अति आत्मविश्वास में नुकसान कर रहे हैं कैप्टेन

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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह अति आत्मविश्वास में पार्टी का नुकसान कर रहे हैं। वे इस भरोसे में हैं कि हर हाल में इस बार के चुनाव में वे जीतेंगे। पिछले दिनों हुए शहरी निकायों के चुनाव नतीजों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। किसान आंदोलन की वजह से शहरी निकायों के चुनाव में अकाली दल, भाजपा और आप तीनों का सूपड़ा साफ हो गया, जबकि कांग्रेस को रिकार्ड जीत मिली। ऊपर से इस बार भाजपा और अकाली दल दोनों अलग अलग हैं। इस आत्मविश्वास में कैप्टेन अमरिंदर सिंह पार्टी आलाकमान की अनदेखी कर रहे हैं, नवजोत सिंह सिद्धू के साथ बातचीत करके सुलह को तैयार नहीं हैं, प्रताप सिंह बाजवा को किसी गिनती में नहीं रख रहे हैं। वे अकेले प्रादेशिक क्षत्रप की तरह पार्टी को चलाना चाह रहे हैं। उन्होंने इसी तेवर के साथ कांग्रेस अध्यक्ष की बनाई तीन सदस्यों की समिति से बात की है।

मुश्किल यह है कि किसान आंदोलन और तमाम सकारात्मक माहौल के बावजूद कैप्टेन अमरिंदर सिंह यह बात भूल रहे हैं अब चुनावों में कोरोना वायरस का प्रबंधन भी एक बड़ा मुद्दा है। इस मामले में उनका प्रदर्शन कोई बहुत अच्छा नहीं रहा है। पंजाब सर्वाधिक मृत्यु दर वाला राज्य है। राज्य में छह लाख भी संक्रमित नहीं हैं, जबकि 15 हजार लोगों की मौत हुई है। मरने वालों की संख्या के लिहाज से पंजाब के ठीक ऊपर पश्चिम बंगाल है, जहां 16 हजार लोग मरे हैं, लेकिन वहां संक्रमितों की संख्या 14 लाख से ज्यादा है। मृत्यु दर के अलावा पंजाब सरकार दोगुने से ज्यादा मुनाफा लेकर निजी अस्पतालों को वैक्सीन बेचने के आरोपों में घिरी है। सोचें, यह कैसी गिरी हुई सोच है कि पंजाब सरकार ने केंद्र से चार सौ रुपए में वैक्सीन खरीद कर एक हजार से ज्यादा रुपए में निजी अस्पतालों को बेची। इन सब बातों से पंजाब सरकार की छवि बिगड़ रही है और चुनाव में इसका नुकसान हो सकता है।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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