सिद्धू को भाव नहीं दे रहे कैप्टेन

किसान आंदोलन शुरू होने के बाद लग रहा था कि पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह और क्रिकेटर से नेता बने पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का विवाद सुलझ जाएगा। कैप्टेन की सरकार से इस्तीफा देने के बाद सिद्धू बिल्कुल वनवास में चले गए थे लेकिन किसान आंदोलन के समय उन्होंने वापसी और किसानों का जम कर समर्थन किया। उसी बीच कैप्टेन ने सिद्धू को खाने पर बुलाया था। इससे लग रहा था कि अब मामला ठीक हो रहा है। लेकिन खबर है कि राहुल और प्रियंका दोनों के प्रयास के बावजूद कैप्टेन ने सिद्धू को बहुत भाव नहीं दिया है। पिछले दिनों राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव हुए, जिनमें कांग्रेस को प्रचंड जीत मिली। अकाली दल, भाजपा और आप तीनों का सूपड़ा साफ हो गया। उसके बाद से कैप्टेन की अकड़ और बढ़ गई है।

कहा जा रहा है कि नगर निगम चुनावों में मिली भारी भरकम जीत के बाद कैप्टेन कोई समझौता करने के मूड में नहीं हैं। कांग्रेस के जानकार सूत्रों के मुताबिक पार्टी आलकमान की ओर से नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की बात हुई थी। सिद्धू भी चाहते हैं कि कैप्टेन की सरकार में दोबारा शामिल होने की बजाय प्रदेश अध्यक्ष बना जाए। लेकिन कैप्टेन इसके लिए कतई तैयार नहीं हैं। वे सिद्धू को सरकार में लेने के लिए जैसे तैसे तैयार हुए हैं पर सिद्धू अभी सरकार में नहीं जाना चाहते। ध्यान रहे अगले साल पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले दोनों में अपनी अपनी पोजिशनिंग हो रही है। चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर चुके कैप्टेन ने अपना ऐलान वापस ले लिया है। वे सत्ता में वापसी का रियल चांस देख रहे हैं। इसलिए वे अभी किसी नेता को इतना भाव नहीं देंगे, जो अगले साल के चुनाव के बाद किसी तरह की चुनौती बने।

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