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Saturday, April 17, 2021
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राहुल ही बनेंगे कांग्रेस अध्यक्ष

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सोनिया गांधी के साथ कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं और परिवार समर्थक वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद अब यह तय हो गया है कि राहुल गांधी ही कांग्रेस के नए अध्यक्ष होंगे। हालांकि बैठक में जब कुछ नेताओं ने उनको अध्यक्ष बनाने की बात कही तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि यह काम संगठन पर छोड़ देना चाहिए, जो एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष का चुनाव करेगी। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा बताते हैं कि पार्टी उनको जो भी जिम्मेदारी देगी वे उसे निभाने को तैयार हैं। अब तक अध्यक्ष बनने से इनकार कर रहे राहुल का यह स्टैंड उनके अध्यक्ष बनने की ओर पहला कदम है।

पांच घंटे चली बैठक के बाद पार्टी के नए कोषाध्यक्ष पवन बंसल ने सबसे ज्यादा इस बारे में ही बताया कि राहुल के अध्यक्ष बनने के बारे में क्या चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस बात पर पार्टी में किसी को आपत्ति नहीं है। हालांकि यह पूरी तरह से सही नहीं है। क्योंकि कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं में से कई नेताओं ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। सोनिया को चिट्ठी लिखने वाले 23 नेताओं में से गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और भूपेंदर सिंह हुड्डा बैठक में शामिल थे। इन तीनों ने बैठक में राहुल के नाम का विरोध नहीं किया पर बताया जा रहा है कि दूसरे नेताओं के साथ बैठक में इन तीनों ने अपनी आपत्ति जाहिर की थी।

कांग्रेस के जानकार सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी को इस बात की खबर है कि पार्टी के असंतुष्ट नेता भले उनके सामने राहुल के नाम का विरोध नहीं कर रहे हैं पर वे इस आइडिया से बहुत खुश भी नहीं हैं। सोनिया को यह भी पता है कि अगर अभी उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ दिया और राहुल की जगह किसी और को अध्यक्ष बनाया तो फिर राहुल का फिर अध्यक्ष बनना मुश्किल हो जाएगा। हो सकता है कि आगे प्रियंका गांधी वाड्रा अध्यक्ष बन जाएं पर सोनिया के बाद राहुल नहीं बने तो वे फिर शायद ही बन पाएंगे। ध्यान रहे पार्टी में अनेक नेता ऐसे हैं, जो राहुल की बजाय प्रियंका को कमान देने की बात कर रहे हैं। सोनिया देश के रामचंद्र गुहा जैसे बौद्धिकों के इस अभियान से भी चिंतित हैं कि गांधी-नेहरू परिवार को कांग्रेस की कमान छोड़नी चाहिए।

तभी कहा जा रहा है कि सोनिया ने तय किया है कि वे अध्यक्ष पद तभी छोड़ेंगी, जब राहुल उनके बाद कमान संभालें। वे पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं और ऊपर किस समय सीमा में चुनाव कराने की बाध्यता नहीं है। इसलिए अगर तुरंत सहमति नहीं बनती है तो चुनाव टल भी सकता है। इस बात को असंतुष्ट नेता भी समझ रहे हैं। इसलिए उन्होंने राहुल के नाम पर आपत्ति करने की बजाय इतना कहा कि पार्टी नेतृत्व को नेताओं के साथ संपर्क रखना चाहिए और चिंतन शिविर का आयोजन होना चाहिए। उसमें ये नेता अपनी बात रख सकते हैं। सो, जल्दी ही पार्टी का चिंतन शिविर होगा। पिछला चिंतन शिविर जयपुर में हुआ था, जिसमें राहुल गांधी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया है।

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