सहयोगी पार्टियों का सद्भाव राहुल के साथ - Naya India
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सहयोगी पार्टियों का सद्भाव राहुल के साथ

राहुल गांधी मई-जून में या उसके एक-दो महीने बाद कांग्रेस अध्यक्ष बनें इसके लिए पार्टी के अंदरूनी समर्थन के साथ साथ यूपीए में शामिल पार्टियों के सद्भाव की भी जरूरत होगी। अगर कांग्रेस के सहयोगी सोनिया-राहुल के नेतृत्व में आस्था जताते हैं तो बागी नेताओं के लिए उनकी अनदेखी मुश्किल होगी। फिर हो सकता है बागी नेता पाल बदलने का प्रयास करें। अलग पार्टी बनाएं, लेकिन पार्टी के अंदर रह कर वे राहुल का ज्यादा विरोध नहीं कर पाएंगे। उनके लिए अच्छी बात यह भी है कि लालू प्रसाद की जेल से रिहाई हो गई है। वे जिन तीन मामलों में सजा काट रहे थे उसमें से आखिरी मामले में भी उनको जमानत मिल गई है। ध्यान रहे सोनिया गांधी परिवार के प्रति उनका हमेशा पूरा समर्थन रहा है। अगर राहुल को अध्यक्ष बनवाने में सहयोगी पार्टियों की कोई भूमिका बनती है तो इस बार भी वे अहम रोल निभा सकते हैं।

लालू प्रसाद के अलावा दूसरे नेता, जिनका बिना शर्त समर्थन राहुल को मिलेगा वे एमके स्टालिन हैं। चुनाव से पहले और बाद की खबरों के आधार पर यह पक्का माना जा रहा है कि वे तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान ही कहा था कि राहुल को आगे बढ़ कर विपक्षी दलों की कमान संभालनी चाहिए। वे अगर राहुल को समूचे विपक्ष का नेता बनाने को तैयार हैं तो कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनका समर्थन करने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और असम में नए बने सहयोगी बदरूद्दीन अजमल को भी राहुल का समर्थन करने में कोई हिचक नहीं है। लेफ्ट के नेताओं का इससे कोई मतलब नहीं है कि कौन कांग्रेस अध्यक्ष बनता है लेकिन अगर राय पूछी जाए या बयान देना हो तो सीताराम येचुरी और डी राजा दोनों राहुल का नाम लेंगे। ले-देकर एनसीपी का मामला थोड़ा संदिग्ध है। हालांकि पिछले दिनों पार्टी सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने सोनिया गांधी से मुलाकात की थी और माना जा रहा है कि आगे की राजनीति सुप्रिया को करनी है इसलिए अंत में वे भी वहीं करेंगी, जो सोनिया गांधी चाहेंगी।

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