Rahul gandhi congress bjp राहुल गांधी से ज्यादातर विपक्षी नेताओं को दिक्कत है
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राहुल से सबको दिक्कत

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Rahul gandhi congress bjp यूपीए का ढांचा नए सिरे से खड़ा करने या नया गठबंधन बनाने में कांग्रेस की समस्या यह है कि राहुल गांधी से ज्यादातर विपक्षी नेताओं को दिक्कत है। ज्यादातर बड़ी पार्टियों के नेता राहुल को अपना नेता मानने को तैयार नहीं हैं। उनमें कुछ लोगों की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं, जिनसे उनको लग रहा है कि वे राहुल को क्यों आगे करें तो कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो भाजपा की ओर से राहुल के खिलाफ किए गए प्रचार को सही मानने लगे हैं। ध्यान रहे भाजपा ने पिछले सात साल में अपने आईटी सेल की मदद से राहुल गांधी को पप्पू के तौर पर स्थापित किया है। भाजपा के नेता अपने हर साधन से सिर्फ राहुल गांधी से लड़ते हैं लेकिन उनको यह भी साबित करने में लगे रहते हैं कि वे किसी लायक नहीं हैं। भाजपा ने यह धारणा बनवाई है कि राहुल के रहने से भाजपा को फायदा होता है। कई विपक्षी पार्टियों के नेता इस बात को सही मानते हैं और उनको लगता है कि राहुल के साथ रहने से उनको नुकसान हो सकता है।

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प्रादेशिक नेताओं की महत्वाकांक्षा या भाजपा के प्रचार को सही मानने की वजह से बहुत कम नेता ऐसे बच गए हैं, जो कांग्रेस के साथ जुड़े हैं। हालांकि इसमें भी उनकी मजबूरी ज्यादा है क्योंकि बिहार, झारखंड से लेकर तमिलनाडु तक क्षेत्रीय पार्टियों को लगता है कि कांग्रेस अलग  लड़ी तो उनको नुकसान पहुंचा सकती है। बहरहाल, राहुल से दिक्कत का आलम यह है कि संसद के चालू सत्र के दौरान मंगलवार और बुधवार दोनों दिन विपक्षी पार्टियों की बैठक हुई, जिसमें राहुल शामिल हुए लेकिन तृणमूल के नेता उसमें नहीं गए। जैसे यह खबर आई कि राहुल विपक्षी नेताओं की बैठक की अध्यक्षता करेंगे और उसके बाद प्रेस को संबोधित करेंगे, तृणमूल के नेता नदारद हो गए। समाजवादी पार्टी के नेता भी विपक्ष की बैठकों में शामिल नहीं हुए। बसपा तो कांग्रेस से दूरी बना ही चुकी है। एनसीपी के नेता जरूर बैठक में शामिल हुए पर राहुल के बारे में शरद पवार की राय सबको पता है। बहरहाल, विपक्ष की बैठक के नाम पर राजद व एनसीपी के अलावा तमिलनाडु और केरल में कांग्रेस की सहयोगी पार्टियां शामिल हुईं।

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