दिल्ली के मीडिया का पायलट प्रेम

सचिन पायलट दिल्ली की मीडिया में खास कर अंग्रेजी मीडिया में बहुत लोकप्रिय रहे हैं। अंग्रेजी मीडिया के कई पत्रकार तो ऐसे हैं, जो उनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। पिछले चुनाव से पहले जब वे प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर राजस्थान में काम कर रहे थे तभी से इन पत्रकारों ने उनको मुख्यमंत्री बनाना शुरू कर दिया था। विधानसभा चुनाव से पहले हुए कुछ उपचुनावों में कांग्रेस की जीत का दिल्ली में ऐसा माहौल बना, जैसे सचिन की वजह से ही कांग्रेस जीती है और अब तो पार्टी नेतृत्व को चाहिए कि उनको मुख्यमंत्री का दावेदार घोषित कर दे। हालांकि इसमें कामयाबी नहीं मिली। फिर चुनाव नतीजों के बाद इसकी मुहिम शुरू हुई कि उनको मुख्यमंत्री बनाया जाए। उसमें भी कामयाबी नहीं मिली तो अब उनकी बगावत के समय ऐसा माहौल बनाया जा रहा है राहुल व प्रियंका गांधी को उनके चरण पकड़ कर माफी मांगनी चाहिए और उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो कांग्रेस खत्म हो जाएगी।

सोशल मीडिया पर सक्रिय कई पत्रकारों ने सचिन पायलट के लिए चियरलीडर्स के तौर पर काम करने वाले पत्रकारों की सूची बनाई है। उनके नाम में जाने की जरूरत नहीं है पर उसमें सबसे तेज चैनल से लेकर देश के सबसे बडे उद्योगपति के चैनल और भाजपा विरोधी होने की झूठी इमेज बना कर काम करने वाले चैनल तक के पत्रकार शामिल हैं। इनमें महिला पत्रकारों की संख्या ज्यादा है। इनमें से एक ने लिखा कि सब इसी तरह जाते रहे तो बचेगा कौन, अकेले राहुल गांधी। दूसरे ने लिखा कि सिंधिया चले गए, पायलट चले जाएंगे तो किसको फायदा होगा, राहुल गांधी को।

किसी ने कांग्रेस को मध्य प्रदेश से सबक लेने की बात कही तो किसी ने पायलट की मेहनत याद दिलाते हुए उनके साथ धोखा होने की दुहाई दी। पायलट के करीबी सूत्रों के हवाले से पिछले तीन दिन से जितनी खबरें चल रही हैं उतनी तो कांग्रेस के आधिकारिक बयानों की भी नहीं चल रही है। असल में इन्हीं पत्रकारों ने पायलट में ऐसी हवा भरी है कि वे पहले दिन से खुद को सचमुच सीएम के दावेदार से कम कुछ समझ ही नहीं रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि अपने चियरलीडर्स की वजह से ही वे बार बार बगावत के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

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