कोरोना के बीच भी होगी राजनीति

चुनाव आयोग ने कमाल किया है। उसने राज्यसभा का चुनाव टाल दिया है। गुरुवार को पांच राज्यों की 18 सीटों पर चुनाव होने वाला था। इसे अगले आदेश तक टाल दिया गया है। हालांकि जिस समय चुनाव आयोग ने यह घोषणा की उससे चंद घंटे पहले ही मध्य प्रदेश की विधानसभा में कार्यवाही चल रही थी और कम से कम 114 विधायकों की मौजूदगी में राज्य सरकार ने विश्वास मत हासिल किया। जाहिर है जब सत्र चला तब विधानसभा का कर्मचारी और वाच एंड वार्ड स्टाफ भी मौजूद रहा होगा। मध्य प्रदेश विधानसभा के इस सत्र से एक दिन पहले तक संसद का बजट सत्र चला। सोमवार को दोनों सदनों में वित्त विधेयक पास कराया गया।

दूसरी ओर चुनाव आयोग को लगता है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से चुनाव कराना ठीक नहीं है। हालांकि राज्यसभा का चुनाव कोई ऐसा चुनाव नहीं है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने की संभावना है। जिस तरह दूसरे जरूरी काम हो रहे हैं उसी तरह राज्यसभा का चुनाव भी हो सकता था। हालांकि ऐसा नहीं है कि इसके बगैर कोई काम रूक रहा है फिर भी अगर चुनाव आयोग चाहता तो राज्यसभा का चुनाव 26 मार्च को हो सकता था।

इसके लिए बहुत ज्यादा तैयारी करने की भी जरूरत नहीं थी। मिसाल के तौर पर झारखंड में कुल 81 मतदाता हैं। आयोग चाहता तो इन सबको अलग अलग समय आवंटित किया जा सकता था। पांच-पांच मिनट के अंतराल पर विधायक वोट डाल सकते थे। विधानसभा में, जहां वोटिंग होती है वहां दो-दो मीटर की दूरी पर विधायकों के खड़े होने का बंदोबस्त हो सकता था। मास्क और सैनिटाइजर की भी व्यवस्था की जा सकती थी। इसी तरह गुजरात में 177 और मध्य प्रदेश में 206 विधायक वोट डालने वाले हैं। राजस्थान में भी दो सौ मतदाता हैं। पर इनके वोट का बंदोबस्त करने की बजाय आयोग ने चुनाव टालने का आसान रास्ता चुना।

तभी इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। ध्यान रहे तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में भाजपा को तीन सीटों का नुकसान होना था। पर इस नुकसान को कम करने के लिए भाजपा ने मध्य प्रदेश और गुजरात में तोड़-फोड़ कराई। कांग्रेस विधायकों का इस्तीफा कराया। राजस्थान में भी भाजपा इस प्रयास में लगी है। पर उसे कामयाबी नहीं मिल पाई है। यह भी कहा जा रहा है कि गुजरात में कांग्रेस के पांच विधायकों से इस्तीफा कराने के बावजूद भाजपा बहुत आश्वस्त नहीं है। ध्यान रहे दो साल पहले इसी तरह के करीबी मुकाबले में कांग्रेस के अहमद पटेल ने भाजपा के तमाम रणनीतिकारों और प्रबंधकों को शिकस्त दे दी थी। सो, यह संभावना भी जताई जा रही है कि भाजपा चुनाव टलने का फायदा उठा सकती है।

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