आजाद क्या भाजपा के पाले में जाएगें? - Naya India
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आजाद क्या भाजपा के पाले में जाएगें?

राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद रिटायर हो गए। 15 फरवरी को उनके कार्यकाल का आखिरी दिन था। पिछले हफ्ते बजट सत्र का पहला हिस्सा संपन्न होने से पहले उनको राज्यसभा में जबरदस्त विदाई दी गई थी। पहली बार ऐसा हुआ कि सदन के किसी सदस्य को विदाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रो पड़े। उनकी और दूसरी पार्टियों के कितने ही सदस्य पिछले सात साल में रिटायर हुए पर कभी ऐसा नहीं हुआ कि प्रधानमंत्री रोने लगें। भावुक होकर विदाई देने के दो दिन बाद प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कांग्रेस पर हमला करते हुए राज्यसभा की मिसाल दी और कहा कि उच्च सदन में कांग्रेस के सांसद अच्छा बरताव करते हैं।

उसके बाद से ही अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि गुलाम नबी आजाद का क्या होगा? कांग्रेस में असंतुष्ट में खेमे में गिने जा रहे हैं। पिछले साल अगस्त में कांग्रेस के 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख कर पार्टी के हर पद के लिए चुनाव कराने की मांग की थी। आजाद उन नेताओं की अगुवाई कर रहे थे। राज्यसभा से विदाई के बाद भी उन्होंने एक निजी टीवी चैनल को इंटरव्यू में कहा है कि कांग्रेस तभी मजबूत होगी, जब सभी पदों के लिए चुनाव होंगे। हालांकि आजाद खुद बहुत कम ही चुनाव लड़े हैं और हमेशा आलाकमान की कृपा से सांसद बने रहे हैं। फिर भी वे चाहते हैं कि हर पद के लिए चुनाव हो। उनके इस रुख ने उनको कांग्रेस आलाकमान से दूर किया है।

उनको लेकर कांग्रेस में एक सोच यह भी है कि वे पाला बदल सकते हैं, जैसा कि कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने बदला है। जम्मू कश्मीर के बदले हुए हालात में भाजपा के लिए भी उनकी उपयोगिता है। भाजपा को कश्मीर में एक ऐसे चेहरे की जरूरत है, जो लोगों का भरोसा हासिल कर सके और भाजपा के एजेंडे को भी पूरा कर सके। सो, आजाद के बारे में ऐसी चर्चा है कि वे भाजपा के साथ जा सकते हैं। हालांकि कांग्रेस के कई जानकार नेताओं का कहना है कि आजाद ने यह चर्चा खुद ही कराई हुई है ताकि उनको कांग्रेस कहीं से राज्यसभा में भेजे। इस समय राज्यसभा के चुनाव सिर्फ केरल में होने हैं। वहां की तीन सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं, कांग्रेस के दिग्गज नेता वायलार रवि रिटायर हो रहे हैं और कांग्रेस को सिर्फ एक ही सीट मिल पाएगी। चुनाव के समय कांग्रेस किसी बाहरी को राज्यसभा नहीं देगी। या तो वायलार रवि रिपीट होंगे या कोई नया स्थानीय नेता राज्यसभा में भेजा जाएगा।

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