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राम माधव के लिखे का क्या मतलब?

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व महासचिव और अब राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के पदाधिकारी राम माधव ने अंग्रेजी के एक अखबार में लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोरोना प्रबंधन का बचाव किया है और विपक्षी पार्टियों की ओर से की जा रही आलोचना का जवाब दिया है। उन्होंने लगभग हर आलोचना का जवाब दिया है और वैसे ही दिया है, जैसे भाजपा का कोई भी प्रवक्ता इस समय दे रहा है। उसमें कुछ भी नया नहीं है। जैसे उन्होंने लिखा कि मोदी के प्रयासों की विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तारीफ की है या अमेरिका, यूरोप में कितने लोग मर गए या 75 साल में देश में स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा नहीं विकसित किया गया आदि-आदि। सो, इस नाते उनके लेख का मतलब समझ में नहीं आता है। पर आखिर में उन्होंने लिखा है कि सरकार को अपने कामकाज में कुछ और पारदर्शी होना चाहिए और कुछ और खुलापन लाना चाहिए।

अब वे संघ के पदाधिकारी हैं इसलिए यह सवाल उठता है कि क्या संघ चाहता है कि सरकार के कामकाज में और पारदर्शिता और खुलापन आए? उन्होंने यह भी लिखा है कि सरकार को लोगों के साथ थोड़ा और जुड़ाव बढ़ाने की जरूरत है। तो क्या संघ को लग रहा है कि सरकार लोगों से दूर हो गई है? ध्यान रहे राम माधव जब तक भाजपा में रहे तब तक वे नरेंद्र मोदी के सबसे चहेते पदाधिकारियों में से थे। दुनिया भर के देशों में उन्होंने मोदी की रैलियां कराईं और डायस्पोरा के साथ उनको जोड़ा। कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक के वे प्रभारी रहे। अब संघ में लौटने के बाद वे अगर लिख रहे हैं कि सरकार को अपने कामकाज में थोड़ी और पारदर्शिता लानी चाहिए, रचनात्मक आलोचना और सरकार से बाहर के विशेषज्ञों की सलाह के प्रति थोड़ा खुलापन होता तो और बेहतर होता और साथ लोगों के साथ थोड़ा और जुड़ाव बढ़ाने की जरूरत है, तो निश्चित रूप से इसका खास मतलब निकलता है।

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