योगी का कद बढ़ने से भाजपा में बेचैनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कद बहुत बढ़ा दिया है। हालांकि उन्होंने किसी का कद छोटा नहीं किया पर अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन और शिलान्यास के पूरे समारोह में योगी की जैसी भूमिका रही और उनको जितना महत्व मिला उससे उनका कद बहुत बड़ा हो गया है। ध्यान रहे पिछले साल ठीक उसी दिन यानी पांच अगस्त को इसी तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने अमित शाह का कद बड़ा किया था। सुबह में कैबिनेट की बैठक हुई थी, जिसमें कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने और जम्मू कश्मीर के विभाजन का फैसला हुआ था। उसके बाद अमित शाह सीधे संसद में पहुंचे थे और उन्होंने इस ऐतिहासिक फैसले की घोषणा की थी।
प्रधानमंत्री की बजाय अमित शाह का घोषणा करना अपने आप में बहुत बड़ी बात थी, जिससे उनका कद और ऊंचा हुआ था। उसी तरह इस बार प्रधानमंत्री ने योगी आदित्यनाथ का कद ऊंचा किया है। वैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाते उनकी ही भूमिका बनती थी पर अगर प्रधानमंत्री नहीं चाहते तो उन्हें इतना महत्व नहीं मिलता। एक इशारे पर सब कुछ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जरिए होने लगता और राजनीतिक नेतृत्व को घर बैठा दिया जाता। नृपेंद्र मिश्र इस ट्रस्ट में हैं उनके जरिए सारे काम हो सकते थे। सीधे पीएमओ से या गृह मंत्रालय से मोनिटरिंग हो सकती थी। राज्य में किसी दूसरे मंत्री या दो उप मुख्यमंत्रियों में से किसी को जिम्मा दिया जा सकता था। पर सब कुछ योगी आदित्यनाथ के हाथ में रहा। बहरहाल, प्रधानमंत्री ने जैसे उनका कद बढ़ाया है उससे भाजपा में बेचैनी है। उनके समकालीन अनेक नेता अपने लिए संभावनाओं के रास्ते बंद होते देख रहे हैं।

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