संविधान की चिंता नहीं है

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन और शिलान्यास को लेकर कांग्रेस पार्टी के लोगों की दो चिंताएं दिख रही हैं। पहली चिंता तो यह है कि अभी शुभ तिथि नहीं है, पवित्र समय नहीं चल रहा है, चतुर्मास है और देवता सो रहे हैं, भादो का महीना और पंचक का समय चल रहा है ऐसे में शिलान्यास हो क्यों हो रहा है। जो नेता इससे थोड़ा ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से सोच रहे हैं उनकी चिंता है कि कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है और ऐसे में अगर धार्मिक कार्यक्रम होता है, जिसमें लोग जुटते हैं तो संक्रमण और फैल सकता है। वैसे भी कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए आईसीएमआर और गृह मंत्रालय ने भी जो दिशा निर्देश जारी किए हैं उनमें हर तरह के धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रोक लगाई गई है।

बहरहाल, शुभ तिथि और कोरोना के खतरे की चिंता कांग्रेस के नेता जता रहे हैं पर संविधान के नियमों, सिद्धांतों का उल्लंघन हो रहा है या कम से कम स्वीकार्य राजनीतिक नैतिकता के मानदंडों का पालन नहीं हो रहा है, उसकी चिंता किसी को नहीं है। प्रधानमंत्री क्यों शिलान्यास कर रहे हैं या एक मुख्यमंत्री क्यों एक धार्मिक कार्यक्रम के मुख्य आयोजक के तौर पर काम कर रहे हैं, यह नहीं पूछा जा रहा है। कांग्रेस नेताओं को समझना चाहिए कि भारत के लोकतांत्रिक गणतंत्र के लिए एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत हो रही है। इस कार्यक्रम के बाद देश की राजनीति को निर्देशित करने वाले दिशा-निर्देशक कारक बदल जाएंगे। इसके बाद राजनीति कभी भी वैसी नहीं रहेगी, जैसा उसे आजादी के बाद से बनाया गया है।

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