मुख्यमंत्रियों को न्योता नहीं मिला

जब अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन और शिलान्यास की तारीख तय हुई तब कहा जा रहा था कि राज्यों के कुछ मुख्यमंत्रियों को बुलाया जाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को न्योता भेजने की चर्चा थी। माना जा रहा था कि बिहार में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और भाजपा ने घोषणा की है कि वह नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी। ऐसे में अगर नीतीश कुमार भूमिपूजन में शामिल होते, शिलान्यास का हिस्सा बनते और मंच पर विराजते तो भाजपा को फायदा होता। पर मेहमानों की जो अंतिम सूची बनी, जिसके बारे में खबर आई थी कि प्रधानमंत्री कार्यालय से उसे मंजूरी मिल है, उसमें नीतीश का नाम नहीं था।
अब इसके कई कारण बताए जा सकते हैं। नीतीश कुमार खुद ही नहीं आना चाहते थे या नीतीश को बुलाते तो बाकी मुख्यमंत्रियों को नहीं बुलाने का क्या कारण बताते, आदि आदि बातें हो रही हैं। पर यह हकीकत है कि किसी भी मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि अयोध्या में मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन नहीं होने वाला है। यह भी कहा गया कि बाद में एक एक करके मुख्यमंत्रियों को बुलाया जाएगा।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पिछले एक साल में दो बार अयोध्या हो आए हैं और उनकी पार्टी खम ठोक कर कह रही है कि उसक लोगों ने विवादित ढांचा गिराया, फिर भी उद्धव ठाकरे को शिलान्यास में शामिल होने का मौका नहीं मिला। असल में इसका एकमात्र मकसद सारा फोकस योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर रखने का है। वे अकेले मुख्यमंत्री होंगे, जो प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख के साथ मंच पर मौजूद होंगे। उनके साथ दूसरा कोई भी नेता नहीं होगा। अगर कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं हुए होते तो गृह मंत्री अमित शाह मंच पर मौजूद रह सकते थे। यह संयोग है कि शिलान्यास कार्यक्रम से ऐन पहले उनको संक्रमण होने की खबर आ गई।

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