शरद पवार और विपक्ष : उम्मीद, भरोसा किस चेहरे से? - Naya India
राजनीति| नया इंडिया|

शरद पवार और विपक्ष : उम्मीद, भरोसा किस चेहरे से?

शरद पवार और विपक्ष

शरद पवार और विपक्ष : शरद पवार के घर पर कुछ विपक्षी पार्टियों और कुछ जाने-माने नागरिकों की जो बैठक हुई है उसका मकसद समझना मुश्किल नहीं है। बैठक के बाद भले पवार की पार्टी के नेता कहें कि यह बैठक उन्होंने नहीं बुलाई थी या यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं थी लेकिन हकीकत सबको पता है। यह 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले देश में लोगों के सामने एक विकल्प पेश करने, एक अलग विचारधारा दिखाने और देश के लोगों को एक अलग कहानी सुनाने के मकसद से हुई। आगे इसका स्वरूप और स्पष्ट होगा। थोड़े दिन के बाद यह भी साफ होगा कि इस समूह के नेता कांग्रेस के नेतृत्व वाले दूसरे मोर्चे का साथ किस तरह का चुनावी तालमेल करेंगे।

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में चुनाव की क्या जल्दी है?

sharad pawar yashwant sinha

लेकिन उससे पहले सवाल है कि क्या इस समूह में ( शरद पवार और विपक्ष) कोई चेहरा ऐसा है, जो उम्मीद जगा सके या देश के लोगों को भरोसा दिलाए? यह प्रयास कुछ कुछ वैसा  ही है जैसा 2011 में अरविंद केजरीवाल ने किया था। उन्होंने इसी तरह देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं को और जाने-माने लोगों को एक जगह इकट्ठा किया था और इंडिया अगेंस्ट करप्शन की शुरुआत की थी। लेकिन तब वे रालेगणसिद्धि से अन्ना हजारे को खोज कर लाए थे और उनके ईर्द-गिर्द एक कहानी बुनी थी, जिसे देश के लोगों ने बहुत ध्यान से सुना और सराहा। अफसोस की बात है कि प्रशांत किशोर के पास वैसा कोई चेहरा नहीं है और न देश के लोगों को सुनाने के लिए मोदी की कहानी से बेहतर कोई कहानी है।

यह भी पढ़ें: आय कर की नई साइट किसका फितूर!

PK prashant Kishor

इसमें संदेह नहीं है कि देश के लोग नए चेहरों पर दांव लगाने में नहीं हिचकते हैं लेकिन उसकी पहले शर्त यह होती है कि चेहरा भरोसा और उम्मीद पैदा करने वाला हो, जैसे जयप्रकाश नारायण का था या जैसे वीपी सिंह का था या जैसे अन्ना हजारे का था। क्या ऐसा कोई चेहरा राष्ट्र मंच की बैठक में दिखा। शरद पवार और यशवंत सिन्हा ने इस बैठक की अध्यक्षता की। क्या ये दोनों चेहरे किसी तरह की उम्मीद पैदा करते हैं? महाराष्ट्र में अपनी मराठा पहचान के दम पर पवार ने अपनी पार्टी को स्थापित किया है लेकिन महाराष्ट्र से बाहर उनकी छवि एक तिकड़मी नेता की है। यशवंत सिन्हा को देश ने देखा हुआ है। उनके वित्त मंत्री रहे यूटीआई घोटाला हुआ था। दोहरे कराधान, मॉरीशस रूट और परिवार को कई सदस्यों की कहानी उस समय खूब चर्चा में रही थी। अब सिर्फ इसलिए उनके ईर्द-गिर्द लोग इकट्ठा नहीं हो सकते हैं कि वे मोदी का विरोध कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: सुशील मोदी या संजय जायसवाल?

यह भी पढ़ें: कैबिनेट के लिए दिलचस्प नामों की चर्चा

बैठक में आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधित्व सुशील गुप्ता कर रहे थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि पैसे के दम पर उन्होंने राज्यसभा की सीट हासिल की है। केटीएस तुलसी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं लेकिन वे कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में शामिल नहीं थे। वैसे भी उनके चेहरे का देश की किसी राजनीतिक धारा में कोई मतलब नहीं है। इसलिए चाय की प्याली में तूफान उठाने का कोई मकसद इन चेहरों से पूरा नहीं होने वाला है। हां, इसके जरिए कांग्रेस पर दबाव बनाने की राजनीति जरूर हो सकती है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *