रिजर्व बैंक का नया कारनामा

भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई ने वैसे तो पिछले चार साल में अनेक बड़े कारनामे किए हैं। नोटबंदी से लेकर बैंकों के बढ़ते एनपीए तक रिजर्व बैंक और उसके पदाधिकारियों की काबिलियत पर अब कोई संदेह नहीं रह गया है। इसके बावजूद भारत सरकार ने सहकारी बैंकों की निगरानी का काम राज्य सरकारों से लेकर रिजर्व बैंक को सौंप दिया है। रिजर्व बैंक ही अब सहकारी बैंकों का नियामक है। बहरहाल, भारत के इस केंद्रीय बैंक का एक नया कारनामा उत्तर प्रदेश से सामने आया है।

पता चला है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रिजर्व बैंक की शाखा में अक्टूबर 2017 से लेकर मार्च 2018 के बीच एक करोड़ पांच लाख रुपए के नकली नोट जमा हुए। ये नोट पांच सौ और एक हजार रुपए पुराने नोट हैं। है न हैरानी वाली बात! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को नोबंदी का ऐलान किया था। उसके बाद 31 मार्च 2017 सारे पुराने नोट जमा करने का समय दिया गया था। उसके बाद जून तक विशेष परिस्थितियों में या बाहर रहने वाले लोगों के पुराने नोट जमा हुए। इसके बाद भी थोड़े समय तक कुछ खास परिस्थितियों में पुराने नोट जमा हुए।

सवाल है कि जब पुराने नोट जमा करने का समय खत्म हो गया था तो अक्टूबर 2017 में कौन  लोग नोट जमा करने लखनऊ के रिजर्व बैंक में पहुंचे थे और मार्च 2018 तक किन लोगों का नोट जमा किया गया? हैरान करने वाली बात यह है कि इन छह महीनों में 9,753 नोट  पांच सौ के और 5,783 नोट एक हजार के ऐसे जमा हुए, जो नकली हैं। जाहिर है सिर्फ नकली नोट तो जमा हुए नहीं होंगे। इसका मतलब है कि करोड़ों रुपए और जमा हुए, जिसमें एक करोड़ पांच  लाख के नकली नोट थे।

अब जाकर इस पर मुकदमा हुआ है। शहर के मेट्रोपोलिटन कोतवाली में असिस्टेंट मैनेजर रंजना मरावी ने मुकदमा कराया है और इन नोटों की फारेंसिक जांच के लिए कहा है। सोचें, एक करोड़ से ज्यादा नकली नोट जमा हुए तो असली कितने जमा हुए होंगे? ऊपर से ढाई साल के बाद मुकदमा किया जा रहा है। क्या अभी तक नोट गिनने और छांटने का काम चल ही रहा है या कुछ और कारण है!

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