मुर्मू क्या खुद कश्मीर में नहीं रहना चाहते थे

गिरीश चंद्र मुर्मू ने जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्य में अनुच्छेद 370 हटाने का जिस दिन एक साल पूरा हुआ उसी दिन उन्होंने इस्तीफा दिया। वैसे वे अक्टूबर में उप राज्यपाल बन कर गए थे। अब खबर है कि वे देश के अगले नियंत्रक व महालेखापरीक्षक, सीएजी बन सकते हैं। बहरहाल, ऐसा लग रहा है कि वे खुद नहीं चाहते थे जम्मू कश्मीर में रहना इसलिए उन्होंने कई मामलों में ऐसा स्टैंड लिया, जिससे केंद्र सरकार को परेशानी हुई। उन्होंने कई संस्थाओं के साथ टकराव के हालात बना दिए थे।

राज्य के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे नहीं थे। खबर है कि वे प्रशासनिक कामकाज की फाइल अपने पास मंगा कर उसे देखने लगे थे। इससे कामकाज में भी मुश्किल हुई। यह भी कहा जा रहा है कि कश्मीर में इंटरनेट की 4जी सेवा बहाल किए जाने को लेकर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से अलग स्टैंड लिया। केंद्र सरकार नहीं चाहती है कि घाटी में इंटरनेट क 4जी सेवा बहाल हो पर वे इसके पक्ष में थे। इसी तरह चुनाव के मसले पर भी उन्होंने चुनाव आयोग को नाराज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर में केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति अनंतकाल तक नहीं बनी रहेगी और परिसीमन का काम पूरा होने के बाद राज्य में चुनाव होंगे। इस पर चुनाव आयोग ने कहा था कि चुनाव कराने का फैसला उसका होगा, उप राज्यपाल इसका फैसला नहीं करेंगे।

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