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Wednesday, May 12, 2021
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बिप्लव देब की मुश्किलें बढ़ेंगी

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त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब लंबे समय से राजनीतिक मुश्किल झेल रहे हैं। किसी तरह से वे अपने खिलाफ पार्टी के अंदर चल रहे बगावत को रोकने में कामयाब हुए थे। इसमें उनको दिल्ली दरबार से बड़ी मदद मिली थी। हालांकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें भी हिदायत दी थी। रैली बुला कर जनमत संग्रह कराने के उनके विचार को स्थगित कराया था। हालांकि ऐसा नहीं था कि उससे उनके खिलाफ नाराजगी खत्म हो गई है। पार्टी के एक दर्जन विधायक अब भी उनसे नाराज हैं और मोर्चा खोलने के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं।

ऐसा लग रहा है कि वह सही समय आ गया है। राज्य में पिछले दिनों त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट कौंसिल का चुनाव हुआ था। कौंसिल की 28 में से 18 सीटें कांग्रेस पार्टी के पूर्व नेता प्रद्योत किशोर देब बर्मन की बनाई नई पार्टी त्रिपुरा इंडिजेनल प्रोग्रेसिव रीजनल एलायंस ने जीती है। सत्तारूढ़ भाजपा को सिर्फ नौ सीटें मिलीं और एक सीट निर्दलीय ने जीती। भाजपा के लिए संतोष की बात सिर्फ इतनी है कि कांग्रेस और लेफ्ट को एक भी सीट नहीं मिली। लेकिन एक नई क्षेत्रीय पार्टी का ऐसा प्रदर्शन भाजपा नेतृत्व की नींद उड़ाने वाला है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि ट्राइबल एरियाज ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट कौंसिल का दायरा बहुत बड़ा है। राज्य के लगभग दो-तिहाई हिस्से में यह फैला है। तभी इसका नतीजा बड़े असर वाला है।

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