केंद्र पर दाम घटाने का दबाव

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार दबाव में है और भले पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि सरकार कीमतें कम करने के लिए उत्पाद शुल्क घटाने पर विचार नहीं कर रही है पर असल में सरकार के अंदर इस पर विचार हो रहा है। जानकार सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क में कमी करके पेट्रोल और डीजल के साथ साथ रसोई गैस के सिलिंडर और विमानों के ईंधन की कीमत में भी कमी पर विचार कर रही है। ध्यान रहे प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दोनों ने बढ़ती कीमतों को लेकर असहायता जताई है लेकिन जल्दी ही सरकार कुछ पहल कर सकती है।

असल में केंद्र सरकार पर इस वजह से भी दबाव बढ़ा है कि कई राज्यों ने अपने यहां वैट या बिक्री कर में कमी शुरू कर दी है। दो चुनावी राज्यों ने दम घटाने की पहल की है। असम ने अपने यहां पांच रुपए प्रति लीटर तक की कमी की है तो पश्चिम बंगाल ने भी प्रति लीटर एक रुपए की कमी की है। मेघालय में चुनाव नहीं पर वहां की राज्य सरकार ने सबसे बड़ी कटौती की है। मेघालय सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत में सात-सात रुपए से ज्यादा की कमी की है। ध्यान रहे मेघालय जैसे छोटे राज्य के पास राजस्व के ज्यादा साधन नहीं हैं फिर भी सरकार ने कटौती की है। इसी तरह सबसे ज्यादा बिक्री कर वाले राज्यों में से एक राजस्थान ने भी अपने कर में कटौती की है।

राज्यों की इस पहल के बाद केंद्र पर दबाव बढ़ गया है कि वह उत्पाद शुल्क में कटौती करके दाम घटाए। ध्यान रहे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो दिन पहले ही चेन्नई के एक कार्यक्रम में कहा था कि वे कर में कटौती तो कर सकती हैं कि लेकिन उन्हें इस बात की गारंटी चाहिए कि दूसरे लोग यानी राज्य अपना कर बढ़ा कर ज्यादा कमाई न करने लगें। हकीकत यह है कि राज्यों ने कमाई बढ़ाने की बजाय कर घटानी शुरू कर दी है।

जानकार सूत्रों के मुताबिक रविवार को भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी पेट्रोल और डीजल की महंगाई का मुद्दा उठा था। हालांकि औपचारिक रूप से इस पर चर्चा हुई है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है पर बताया जा रहा है कि ज्यादातर नेताओं ने पेट्रोलियम उत्पादों की महंगाई का मुद्दा उठाया। पांच राज्यों के चुनाव और कृषि कानूनों के अलावा सबसे ज्यादा चर्चा का मुद्दा पेट्रोल और डीजल की कीमत थी। पार्टी के प्रवक्ताओं और दूसरे नेताओं ने यह भी कहा बताते हैं कि मीडिया या सोशल मीडिया में पेट्रोल-डीजल की महंगाई का बचाव करना मुश्किल होता जा रहा है। इस मुद्दे पर भाजपा के समर्थकों में भी नाराजगी है। दो वर्ग किसान आंदोलन के मुद्दे पर पूरी तरह से भाजपा और सरकार के साथ है वह भी इस मुद्दे पर सरकार का विरोध कर रहा है या चुप है। दो राज्यों में पेट्रोल की कीमत 101 रुपए से ज्यादा हो गई है और इसे लेकर सोशल मीडिया में खूब मजाक बन रहा है।

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