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Thursday, May 6, 2021
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नए अटॉर्नी जनरल की तलाश!

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तुषार मेहता केंद्र सरकार के सॉलिसीटर जनरल हैं। पर कहा जा सकता है कि वे ही असली अटॉर्नी जनरल भी हैं। वैसे अटॉर्नी जनरल का पद संवैधानिक होता है और सॉलिसीटर जनरल का पद वैधानिक। अटॉर्नी जनरल देश का प्रतिनिधित्व करता है और सॉलिसीटर जनरल सरकार का। लेकिन पिछले कुछ समय से यह भेद मिटा हुआ है। एक तो भारत में देश और सरकार एक हो गए हैं। यह माना जाने लगा है कि प्रधानमंत्री ही सरकार हैं और सरकार ही देश है। तभी प्रधानमंत्री की किसी बात का विरोध सरकार का विरोध है और सरकार का विरोध देश का विरोध है। उसी तरह से यह स्थिति बन गई है, जिसमें लग रहा है कि सॉलिसीटर जनरल ही अटॉर्नी जनरल हैं। इसका कारण यह है कि पिछले काफी समय से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की सक्रियता बहुत कम कम हो गई है।

दिमाग पर बहुत जोर डालने के बावजूद इक्का दुक्का मामलों के अलावा अटॉर्नी जनरल के रूप में वेणुगोपाल के अदालत में पेश होने की मिसाल याद नहीं आएगी। इसके उलट जब मुकुल रोहतगी अटॉर्नी जनरल थे तो सभी अहम मामलों में वे खुद हाजिर होते थे। अब ज्यादातर मामलों में सॉलिसीटर जनरल हाजिर होते हैं। वेणुगोपाल की उम्र 89 साल है और कहा जा रहा है कि वे फिर से अटॉर्नी जनरल नहीं बनना चाहते थे। सूत्रों के मुताबिक उनको अस्थायी व्यवस्था के तौर पर ही एक कार्यकाल और दिया गया है। केंद्र सरकार हरीश साल्वे को अटॉर्नी जनरल बनाना चाहती है। पर उन्होंने थोड़ा समय मांगा है। इसलिए वेणुगोपाल को एक विस्तार मिला है। तब तक तुषार मेहता ही दोनों पदों की अघोषित रूप से जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनकी मदद के लिए गुजरात से एक और वकील को अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल बना कर लाया गया है। एसवी राजू नए एएसजी बने हैं। माना जा रहा है इससे राजनेताओं से जुड़े मुकदमों में तेजी आएगी।

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