शाहनवाज को बिहार भेजने का मतलब


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन को पार्टी बिहार भेज रही है। उनको बिहार विधान परिषद का सदस्य बनाया जा रहा है। शाहनवाज पिछले काफी समय से पार्टी में तो सक्रिय हैं, लेकिन एक तरह से राजनीतिक बियाबान में भटक रहे हैं। भाजपा के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक होने, देश के सबसे युवा केंद्रीय मंत्री होने का तमगा होने और अटल बिहारी वाजपेयी के नवरत्नों में शामिल रहे होने के बावजूद पार्टी के मौजूदा निजाम में उनकी पूछ कम हो गई है। वे 2014 में बहुत मामूली अंतर से भागलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव हार गए थे। उसके बाद 2019 में उनको पार्टी ने टिकट नहीं दिया। पिछले साढ़े छह वर्षों में मुख्तार अब्बास नकवी फिर से राज्यसभा में गए और पार्टी ने कांग्रेस में रहे जफर इस्लाम को भाजपा में लाकर राज्यसभा में भेजा। पर शाहनवाज को राज्यसभा देने पर विचार नहीं हुआ। अब उनको एमएलसी बना कर बिहार भेजा जा रहा है।

उनको सुशील मोदी के राज्यसभा में चले जाने से खाली हुई एमएलसी वाली सीट मिली है। सुशील मोदी की छोड़ी सीट शाहनवाज के लिए लकी रही है। 2004 के लोकसभा चुनाव में शाहनवाज हार गए थे और सुशील मोदी भागलपुर सीट से जीते थे। 2005 में जब सुशील मोदी बिहार में उप मुख्यमंत्री बन गए तो उनकी खाली की हुई भागलपुर सीट से शाहनवाज लड़े और वहां से दो बार जीते। उस दौरान वे केंद्र में मंत्री भी रहे। सो, हो सकता है कि इस बार भी सुशील मोदी की सीट उनको रास आए। हो सकता है कि उनको बिहार में कोई और बड़ी जिम्मेदारी मिले। लेकिन उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उनको बिहार भेज कर भाजपा ने एक बड़ा मैसेज दिया है।

असल में बिहार भाजपा में प्रदेश की राजनीति करने वाला कोई बड़ा नेता नहीं बचा है। सुशील मोदी के सांसद बनने के बाद से पार्टी को एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी, जिसके लोग जानते हों और जो पार्टी व सरकार दोनों मंचों पर जोरदार तरीके से अपनी बात कह सके। दूसरे, शाहनवाज के जरिए पार्टी ने बिहार के मुस्लिमों को भी एक मैसेज दिया है। ध्यान रहे मुख्तार अब्बास नकवी जरूर केंद्रीय मंत्री हैं पर व्यापक मुस्लिम समाज में शाहनवाज ज्यादा भरोसा पैदा कर सकते हैं। उन्होंने डीडीसी चुनाव के दौरान कश्मीर घाटी में जितनी मेहनत की और जिस तरह से मुस्लिमों को जोड़ा वह बेमिसाल है। तीसरे, यह एक हकीकत है कि नीतीश कुमार, शाहनवाज हुसैन को पसंद नहीं करते हैं। सो, उनका बिहार जाना नीतीश पर दबाव बनाने की भाजपा की बड़ी रणनीति का एक हिस्सा है।

 


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