कांग्रेस से नाराज शिव सेना और एनसीपी!

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महाराष्ट्र में शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन महा विकास अघाड़ी की सरकार के डेढ़ साल होने वाले हैं और पहली बार गठबंधन को लेकर गंभीर समस्या पैदा हुई है। इससे पहले तीनों पार्टियों के बीच कुछ-कुछ मुद्दों पर मतभेद होता रहा था, जिसे सुलझा लिया गया था। लेकिन अब कांग्रेस के बेहद आक्रामक तरीके से राजनीति शुरू करने के बाद शिव सेना और एनसीपी दोनों नाराज हैं। शिव सेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना में लेख के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की है।

कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि शिव सेना और एनसीपी दोनों चाहते  थे कि कांग्रेस घटक दल की तरह आचरण करे और स्वतंत्र राजनीति न करे। लेकिन कांग्रेस को लग रहा है कि छह साल पहले तक वह राज्य की नंबर एक पार्टी थी और लगातार 15 साल तक सरकार का नेतृत्व किया था, इसलिए वह फिर अपनी पुरानी जगह हासिल कर सकती है। तभी कांग्रेस ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में पार्टी के ऐसे नेताओं को नियुक्त किया, जिनकी छवि आक्रामक राजनीति करने की है।

कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर नाना पटोले को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसके लिए पटोले ने स्पीकर पद से इस्तीफा दे दिया। इससे शिव सेना नाराज है। उसका कहना है कि कांग्रेस को पांच साल के लिए स्पीकर का पद दिया गया था उसे इसके ऊपर राजनीति को तरजीह नहीं देनी चाहिए। ध्यान रहे पटोले विदर्भ इलाके के मजबूत व आक्रामक नेता हैं और किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। उन्होंने 2014 के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़ दी थी और भाजपा की टिकट पर भंडारा गोंदिया सीट से चुनाव लड़ा था, जहां एनसीपी के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल को हराया था। हालांकि बाद में नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए वे वापस कांग्रेस में लौट गए।

इससे पहले कांग्रेस ने अपने पुराने और मजबूत नेता भाई जगताप को मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। कृपाशंकर सिंह के बाद कांग्रेस ने तीन अध्यक्ष नियुक्त किए थे लेकिन कोई भी कांग्रेस के लिए कारगर साबित नहीं हुआ। भाई जगताप को मुंबई कांग्रेस के दिग्गज नेता गुरदास कामत की टक्कर का नेता माना जाता है। सो, भाई जगताप और नाना पटोले की नियुक्ति से कांग्रेस की दोनों सहयोगी पार्टियों में चिंता हुई है। दोनों को लग रहा है कि कांग्रेस की यह राजनीति गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकती है। शिव सेना को खासकर चिंता हो रही है क्योंकि अगले साल बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी का चुनाव है। शिव सेना के लिए राज्य की सरकार के बराबर ही महत्वपूर्ण बीएमसी है, जिस पर पिछले 25 साल से उसका  नियंत्रण है। भाई जगताप ने ऐलान किया है कि कांग्रेस अकेले लड़ेगी। तभी ऐसा लग रह है कि आने वाले दिनों में महा विकास अघाड़ी में टकराव बढ़ सकता है।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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