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शिव सेना का बीएमसी चुनाव पर फोकस

अगले साल बृहन्नमुंबई महानगर पालिका यानी बीएमसी के चुनाव होने वाले हैं। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना के लिए बीएमसी का चुनाव उतना ही अहम है, जितना विधानसभा का चुनाव होता है। ध्यान रहे बीएमसी का बजट कई राज्यों के बजट से ज्यादा है और पिछले करीब ढाई दशक से बीएमसी पर शिवसेना का नियंत्रण है। पिछली बार शिव सेना और भाजपा के बीच सीटों का अंतर बहुत कम का रह गया था। सो, इस बार शिवसेना के लिए वास्तविक चुनौती भाजपा की है। हालांकि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की साझा ताकत कम नहीं है और अगर तीनों पार्टियां मिल कर बीएमसी की चुनाव लड़ती हैं तो उनके लिए लड़ाई बहुत आसान होगी। लेकिन यह फैसला होने से पहले शिवसेना अपनी तैयारी अलग कर रही है। वह कोरोना वायरस की महामारी के खिलाफ लड़ाई इस अंदाज में लड़ रही है जैसे उसे बीएमसी का चुनाव अकेले की लड़ना है।

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इसमें बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने कमाल किया है। शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने चहल को पूरी छूट दे रखी है। वे किसी राज्य के मुख्य सचिव की तरह फैसले कर रहे हैं। उन्होंने कोरोना वायरस से लड़ने का जो मॉडल बनाया आज पूरे देश में उसकी चर्चा हो रही है। अब वे वैक्सीनेशन अभियान में लगे हैं। बीएमसी पहला और एकमात्र नगर निगम है, जिसने स्वतंत्र रूप से वैक्सीन खरीदने का टेंडर निकाला है। बीएमसी ने मुंबई के लोगों को टीका लगवाने के लिए एक करोड़ वैक्सीन डोज खरीदने का फैसला किया है और इसके लिए सात सौ करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। बीएमसी के टेंडर पर एस्ट्राजेनेका और स्पूतनिक सहित सात प्रतिक्रिया मिली है। एक हफ्ते में टेंडर की अवधि खत्म होने के बाद खरीद की प्रक्रिया शुरू होगी। केरल में कोरोना प्रबंधन के नाम पर लेफ्ट सरकार की वापसी ने शिव सेना की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। सो, उसने कोरोना कंट्रोल करने के साथ साथ अगले तीन महीने में मुंबई के हर व्यक्ति को टीका लगाने का देने का लक्ष्य तय किया है।

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