सपा, बसपा, कांग्रेस में ब्राह्मण वोट की मारामारी

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोट को लेकर गजब राजनीति हो रहा है। ब्राह्मण पिछले दो लोकसभा चुनावों से भाजपा को वोट दे रहे हैं। विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने भाजपा को ही वोट किया। उससे पहले उनका वोट भाजपा, बसपा और कांग्रेस में बंटता रहा था। समाजवादी पार्टी को सबसे कम ब्राह्मण वोट मिलते रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री रहते मुलायम सिंह यादव ने भी परशुराम जयंती मनाने का चलन शुरू कराया था और परशुराम जयंती पर छुट्टी की घोषणा की थी। अब सपा के साथ साथ बसपा भी परशुराम को ब्राह्मण प्रतीक बना कर राजनीति कर रही है। दोनों पार्टियां परशुराम की मूर्ति बनाने का ऐलान किया। फिर बसपा प्रमुख मायावती ने आगे बढ़ कर कहा कि परशुराम के नाम से अस्पताल बनाए जाएंगे।

सवाल है कि अचानक इस ब्राह्मण प्रेम का क्या कारण है? इसके दो कारण दिख रहे हैं। पहला कारण तो यह है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार के बारे में यह धारणा बनी है कि सरकार ब्राह्मण विरोधी है। ब्राह्मण अपराधी मारे जा रहे हैं तो उससे भी नाराजगी बढ़ रही है क्योंकि वे भी समाज की अस्मिता से जुड़े हैं। दूसरा कारण कांग्रेस और खास कर प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रियता का है। इस बीच राज्य में कांग्रेस के ब्राह्मण नेता जितिन प्रसाद ने ब्राह्मण चेतना परिषद बना कर समाज से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात पर प्रतिक्रिया देनी शुरू की है। ध्यान रहे ब्राह्मण पहले भाजपा के साथ रहे हैं और अटल बिहारी वाजपेयी की वजह से भाजपा से जुड़े थे। प्रियंका की सक्रियता से सभी पार्टियों को लग रहा है कि ब्राह्मण कांग्रेस की ओर लौट सकता है। ब्राह्मण लौटा तो फिर मुस्लिम भी कांग्रेस के साथ जाएगा और तब दलित वोट का भी एक हिस्सा कांग्रेस से जुड़ सकता है। तभी असल में सपा को मुस्लिम वोट की और बसपा को दलित वोट की चिंता है, जिसके लिए वे ब्राह्मण वोट के लिए मुखर हुए हैं।

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