जीएसटी पर सरकार का प्रस्ताव राज्य मानेंगे!

केंद्र सरकार ने वस्तु व सेवा कर, जीएसटी के बकाए के बारे में अब राज्यों को एक नया प्रस्ताव भेजा है। जीएसटी कौंसिल की 41वीं बैठक में तो जो प्रस्ताव रखा गया था उसे लगभग सभी विपक्षी सरकारों ने खारिज कर दिया है। वे खुद कर्ज लेने या केंद्र सरकार के कर्ज दिलाने के प्रस्ताव पर सहमत नहीं हैं। तभी उसके दो दिन बाद केंद्र की ओर से राज्यों को नया प्रस्ताव भेजा गया, जिसमें कुछ बदलाव किया गया है। केंद्र ने कहा है कि वह कर्ज लेकर बकाया चुकाएगी और कर वसूली के पैसे से कर्ज का भुगतान करेगी।

हालांकि इसमें भी कुछ शर्तें हैं। जैसे केंद्र सरकार राज्यों के 97 हजार करोड़ रुपए के बकाए का भुगतान करती है तो उसके लिए कर्ज लेगी और पूरा कर्ज चुकाएगी। उसमें राज्यों पर कोई बोझ नहीं डाला जाएगा। लेकिन कोरोना महामारी के असर से हुए नुकसान को भी जोड़ा जाता है और 2.35 करोड़ रुपए बकाए का भुगतान करना है तो फिर केंद्र सबका बोझ नहीं उठाएगा। केंद्र का कहना है कि राज्य इतनी रकम का कर्ज लें, जिसमें से 97 हजार करोड़ रुपए केंद्र का कर्ज माना जाएगा और बाकी 1.38 लाख करोड़ राज्यों का कर्ज माना जाएगा। कर्ज की पूरी यानी 2.35 करोड़ रुपए के मूलधन पर लगने वाला ब्याज कर वसूली के पैसे से चुकाया जाएगा। बताया जा रहा है कि कुछ राज्य इन प्रस्ताव को ठीक मान कर विचार के लिए तैयार हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares