पी साईनाथ को होना था कमेटी में!

केंद्र सरकार के बनाए कृषि कानूनों और किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाने की बात कोई एक महीने पहले कही थी। उसके बाद जब भी सुनवाई हुई अदालत ने इस पर जोर दिया कि वह कमेटी बना देगी। आखिरकार सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को सुनवाई में चार सदस्यों की एक कमेटी बना दी। कमेटी में जिन सदस्यों को रखा गया है वे सब सरकार के समर्थक हैं और उसके बनाए कानूनों का भी समर्थन करते हैं, यह बात सब जानते हैं और कह भी रहे हैं। पर यह सवाल नहीं उठ रहा था कि कृषि विशेषज्ञ और पत्रकार पी साईनाथ कमेटी में क्यों नहीं हैं?

यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पहले की सुनवाई में खुद कहा था कि वह कमेटी बनाएगी और उसे पी साईनाथ जैसे लोगों को रखा जाएगा। सवाल है कि जब सुपीम कोर्ट ने खुद पी साईनाथ का नाम लिया था तो उनको कमेटी में क्यों नहीं रखा? क्या अदालत ने यूं ही उनका नाम ले लिया था, उनको कमेटी में रखना नहीं था? या उनसे एप्रोच किया गया और उन्होंने मना कर दिया या सरकार नहीं चाहती थी कि पी साईनाथ जैसा कोई व्यक्ति कमेटी में रहे? कारण किसी को पता नहीं है।

इसी तरह सोमवार की सुनवाई के बाद खबर आई थी कि अदालत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में कमेटी बनाने पर विचार कर रही है। लेकिन कमेटी बनी तो उसमें कोई रिटायर जज भी नहीं है। सोचें, कितनी हैरान करने वाली बात है कि सुनवाई में तो जस्टिस लोढ़ा और पी साईनाथ के नाम की चर्चा हो और कमेटी बने तो ये दोनों उसमें से गायब हों!

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