राजनीति

सुप्रीम कोर्ट के सम्मान की धज्जियां!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को केरल में चुनाव प्रचार करते हुए केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन पर तीखा हमला किया और आरोप लगाया कि राज्य की वामपंथी सरकार धार्मिक स्थलों को अस्त-व्यस्त किया। उन्होंने सबरीमाला मंदिर के भक्तों को रोकने और उनके साथ सख्ती करने के लिए भी राज्य सरकार की आलोचना की।

सोचें, एक राज्य के मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए सारे उपाय किए तो उसकी तारीफ करने की बजाय देश का प्रधानमंत्री इसके लिए उसकी आलोचना कर रहा है! सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने चार-एक के बहुमत से फैसला सुनाया था कि हर उम्र की महिला को मंदिर में प्रवेश की अनुमति होगी। सबरीमाला के भक्तों और मंदिर प्रबंधन ने इसका विरोध किया और युवा महिलाओं के प्रवेश करने से रोका। राज्य सरकार ने पूरी सख्ती करके सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराया। क्या इसके लिए मुख्यमंत्री की आलोचना हो सकती है?

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में मंदिर निर्माण का फैसला सुनाया तो खुद प्रधानमंत्री ने जाकर शिलान्यास किया और सबरीमाला के मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया तो प्रधानमंत्री उसकी आलोचना कर रहे थे। अब भले सबरीमाला का मामला संविधान बेंच में है पर जब विजयन सरकार ने उसे लागू किया था तब वह सर्वोच्च अदालत की पांच जजों की बेंच का फैसला था।

इसी तरह प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु की सभा में जल्लीकट्टू को लेकर बयान दिया। उन्होंने इसके लिए भी डीएमके और कांग्रेस की आलोचना की। हालांकि यह अलग बात है कि कुछ दिन पहले ही बैलों को सींग से पकड़ कर रोकने के इस पारंपरिक खेल में राहुल गांधी भी दर्शक के तौर पर शामिल हुए थे। लेकिन प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि डीएमके और कांग्रेस इस परंपरा को खत्म कर रहे थे। ध्यान रहे इस परंपरा पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी और यह मामला भी संविधान बेंच के पास भेजा गया है।

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