संक्रमितों की संख्या घटने का सस्पेंस

भारत भूमि वैसे भी रहस्य, रोमांच और चमत्कारों की भूमि रही है। इसलिए कोरोना काल में भी कई किस्म के चमत्कार होते दिख रहे हैं। ऐसा ही एक चमत्कार इन दिनों हो रहा है। इन दिनों लगातार कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या घटने लगी है। करीब दो हफ्ते पहले जो संख्या हर दिन 97 हजार तक पहुंच गई थी और लगातार 90 हजार से ऊपर संक्रमित मिल रहे थे वहीं अब यह औसत संख्या 80 हजार के करीब पहुंच गई है। सरकार कह रही है कि उसने टेस्ट बढ़ाए हैं और उसी वजह से संख्या कम हो रही है। दुनिया के दूसरे देशों में टेस्ट बढ़ाया जाता है तो संक्रमितों की संख्या बढ़ती है। भारत में उलटा हो रहा है। टेस्ट की संख्या बढ़ाने पर संक्रमितों की संख्या घट रही है।

यह चमत्कार इसलिए भी लग रहा है क्योंकि इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने अपने दूसरे सीरो सर्वे में बताया है कि अगस्त में भारत के 6.6 फीसदी लोगों को संक्रमण हो चुका था। यह सर्वे अगस्त-सितंबर में कराया गया था और इसके मुताबिक दस साल से ऊपर से 15 में से हर एक भारतीय को संक्रमण हुआ है। इसके आधार पर आईसीएमआर ने खुद चेतावनी दी है कि भारत में अभी 90 फीसदी से ज्यादा आबादी संक्रमण का संभावित शिकार है।

अगर अगस्त में भारत के सात करोड़ के करीब लोग संक्रमित हुए और अगर आर फैक्टर यानी संक्रमण फैलने की दर एक भी मान लें तो इन सात करोड़ लोगों ने सात करोड़ और लोगों को संक्रमित किया होगा। तो उनकी संख्या रोज के संक्रमितों की संख्या में क्यों नहीं दिख रही है? अगर 90 फीसदी से ज्यादा लोग संक्रमण के खतरे के दायरे में हैं तो टेस्ट बढ़ने पर संक्रमितों की संख्या बढ़नी चाहिए लेकिन यहां उलटा हो रहा है। इसी तरह दो महीने पहले अगस्त में दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की संख्या तीन अंकों में आ गई थी पर 15 अगस्त का समारोह खत्म होने के तुरंत बाद यह संख्या बढ़ने लगी और पिछले दिनों साढ़े चार हजार तक पहुंच गई। कहीं राष्ट्रीय स्तर पर भी तो कुछ ऐसा ही नहीं हो रहा है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares