Tata Infosys anti national टाटा, इंफोसिस क्या देशविरोधी
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टाटा, इंफोसिस क्या देशविरोधी!

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Tata Infosys anti national देश में इन दिनों एक ही विभाजन सबसे साफ दिख रहा है और वह है देशभक्त बनाम देशद्रोही का है। जो भी सरकार का विरोध करेगा, सरकार की किसी नीति पर सवाल उठाएगा वह देशविरोधी है और जो आंख मूंद कर सरकार की हर नीति का समर्थन करेगा वह देशविरोधी है। इसी तरह का विभाजन उद्योगपतियों, कारोबारियों में भी दिखने लगा है। पहले सिर्फ राहुल बजाज और उनके बेटे राजीव बजाज पर ही हमला हो रहा था अब इस सूची में कई और उद्योगपतियों के नाम जुड़ गए हैं। हैरानी की बात है कि दो सबसे सम्मानिक उद्योगपतियों को देशविरोधी की सूची में शामिल कर दिया गया है।

देश के उद्योग व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने टाटा समूह को देश विरोधी कहा। उन्होंने उद्योग परिसंघ की बैठक में टाटा की ओर इशारा करते हुए उसे देशविरोधी कहा क्योंकि टाटा समूह ने केंद्र सरकार की ई-कॉमर्स पॉलिसी का विरोध किया था। खबर है कि गोयल की टिप्पणी के बाद हड़कंप मच गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद गोयल को फटकार लगाई, जिसके बाद उन्होंने माफी मांगने के लिए टाटा समूह के चेयरमैन चंद्रशेखरन को फोन किया पर वे लाइन पर नहीं आए। बाद में चंद्रशेखरन के नीचे के किसी अधिकारी को फोन करके गोयल ने सफाई दी।

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टाटा समूह को देशविरोधी बताने का विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य में इंफोसिस को देशविरोधी बता दिया गया। ध्यान रहे इंफोसिस वह कंपनी है, जिसमें दुनिया भारतीय उद्यमिता की धाक जमाई। इसके प्रमोटर नारायण मूर्ति को रतन टाटा के समकक्ष देश का सबसे सम्मानित उद्योगपति माना जाता है। उनकी कंपनी ने भारत सरकार के टैक्स पोर्टल बनाए, जिसमें कुछ तकनीकी समस्याएं आ रही हैं। उसे लेकर पांचजन्य ने कंपनी को नक्सलियों, वामपंथियों और टुकड़े टुकड़े गैंग का सहयोगी बताया। तीन-चार दिन तक इसका प्रचार होता रहा और उसके बाद आरएसएस के प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने ट्विट करके एक लचर सी दलील दी कि पांचजन्य में छपे लेख को पांचजन्य या आरएसएस का विचार नहीं माना जाए।

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सोचें, क्या केंद्र सरकार के किसी मंत्री ने या भाजपा के किसी नेता ने या भाजपा के वैचारिक जनक आरएसएस के किसी पदाधिकारी ने कभी भी नीरव मोदी या मेहुल चोकसी को सार्वजनिक रूप से देशविरोधी बताया है? क्या कभी इन समूहों ने किसी बात को लेकर अंबानी और अडानी को देशविरोधी बताया है? देश की संपत्ति लूट कर तीन दर्जन से ज्यादा कारोबारी भारत छोड़  कर चले गए। दर्जनों कारोबारी दिवालिया संहिता के सहारे बैंकों को लाखों करोड़ रुपए का चूना लगा रहे हैं। लेकिन इनमें से किसी को देशविरोधी नहीं बताया जाता है। लेकिन देश के दो सबसे सम्मानित कारोबारी देशविरोधी हैं! अब भले सफाई दे दी जाए लेकिन उनके प्रति धारणा का पता चल गया है।

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