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ठाकरे परिवार को चमत्कार की उम्मीद

shiv sena case

लाख टके का सवाल है कि उद्धव ठाकरे इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं? उनको पता है कि वे बहुमत गंवा चुके हैं। उनके पास भले पार्टी और संगठन है लेकिन विधायकों का बहुमत उनसे दूर जा चुका है। उनके 40 के करीब विधायक उनसे अलग होकर एकनाथ शिंदे के साथ हैं और भाजपा के साथ मिल कर सरकार बनाना चाह रहे हैं। इसके बावजूद उद्धव इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास खाली कर दिया लेकिन मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं। अगर उनको भरोसा है कि वे सदन में बहुमत साबित कर देंगे तो उनको कैबिनेट की बैठक करके विधानसभा का सत्र बुलाने की सिफारिश राज्यपाल से करनी चाहिए और अगर लग रहा है कि बहुमत गंवा चुके हैं तो इस्तीफा देना चाहिए। लेकिन वे कुछ नहीं कर रहे हैं।

ऐसा लग रहा है कि उनको चमत्कार की उम्मीद है। उनको लग रहा है कि जिस तरह का चमत्कार अक्टूबर 2019 में शरद पवार ने किया था उसी तरह का चमत्कार वे फिर कर देंगे। लेकिन उस समय मामला शरद पवार की अपनी पार्टी और उनके अपने भतीजे अजित पवार का था। इस बार मामला शिव सैनिकों का है। शिव सैनिक शरद पवार के बस में नहीं है। तभी पवार बार बार कह रहे हैं कि उनको उद्धव पर भरोसा है कि उनके विधायक गुवाहाटी से लौटेंगे तो फिर शिव सेना के खेमे में आ जाएंगे। लेकिन ऐसा होने का खुद उद्धव को भरोसा नहीं है।

सबसे हैरानी की बात है कि विधायकों का पहला गुट सूरत होकर गुवाहाटी चला गया तो पवार बहुत हैरान हुए थे कि उनके जाने की सूचना कैसे नहीं लगी। लेकिन उसके बाद एक-एक, दो-दो करके कई विधायक सीधे गुवाहाटी गए तो उन्हें क्यों नहीं रोका जा सका? इससे भी हैरानी की बात है कि निर्दलीय विधायकों को रोकने या समझाने का प्रयास पवार ने क्यों नहीं किया? शिव सैनिकों पर उनका जोर नहीं है लेकिन निर्दलीय विधायकों को तो वे समझा सकते थे। तभी ऐसा लग रहा है कि ठाकरे परिवार जिस तरह के चमत्कार की उम्मीद पवार से कर रहा है वह इस बार नहीं होने वाला है।

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