common opposition is UPA साझा विपक्ष ही यूपीए है
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साझा विपक्ष ही यूपीए है

common opposition is UPA

ममता बनर्जी की इस बात को किसी का समर्थन नहीं मिला है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए जैसी कोई चीज नहीं है। उनकी इस बात को भी विपक्ष की ओर से समर्थन नहीं मिल रहा है कि कांग्रेस ने कुछ नहीं किया, उसके नेता विदेश में रहते हैं, इसलिए नई पहल की जरूरत है। संसद सत्र के दौरान कई विपक्षी नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में इस पर जोर दिया कि साझा विपक्ष ही असल में यूपीए है। राष्ट्रीय जनता दल के एक नेता ने याद दिलाया कि पिछले सत्र में ही कांग्रेस की पहल पर कितनी चीजें हुई थीं।

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान राहुल गांधी ने विपक्ष के नेताओं के साथ कई बार बैठक की थी और साझा रणनीति बना कर संसद में सरकार को घेरा गया था। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर राहुल गांधी जिस दिन साइकिल से संसद पहुंचे थे उस दिन लगभग सभी विपक्षी पार्टियों के सांसद उनके साथ साइकिल चला रहे थे। राजद के सांसदों के साथ साथ तृणमूल के सांसद भी उनके साथ थे। इसी तरह राहुल गांधी उस सत्र में एक दिन ट्रैक्टर से भी संसद पहुंचे थे और एक दिन कांस्टीट्यूशन क्लब में विपक्षी नेताओं के साथ बैठक की थी।

संसद सत्र के पहले हफ्ते के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को शिव सेना के सांसदों ने भी कहा कि जब यूपीए की जरूरत नहीं होती है तो वह दिखाई भी नहीं देती है। उनके हिसाब से संसद सत्र के दौरान विपक्ष के एकजुट होने की जरूरत होती है और उस समय कांग्रेस पार्टी सबको एकजुट करती है। संसद सत्र के दौरान एकजुटता दिखाने के अलावा यूपीए की जरूरत चुनाव के समय है और अभी कोई ऐसा चुनाव नहीं हुआ है, जिसमें गठबंधन के रूप में लड़ने की जरूरत हो। इसलिए अस्तित्व में होने के बावजूद यूपीए दिखाई नहीं देता है।

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यह जरूर है कि धीरे धीरे यूपीए में रहीं कई पार्टियां गठबंधन छोड़ कर जा चुकी हैं। लेकिन कई नई पार्टियां कांग्रेस के साथ जुड़ी भी हैं। पुरानी पार्टियों में राजद, जेएमएम, एनसीपी, डीएमके, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग आदि पार्टियां अब भी यूपीए के साथ हैं। दो साल पहले शिव सेना भी इस गठबंधन में शामिल हुई है। पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम भी यूपीए में थी लेकिन अब वह पार्टी ही अस्तित्व में नहीं है। किसी जमाने में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस भी यूपीए में थी लेकिन वे 2012 में ही यूपीए से अलग हो गईं। कर्नाटक में सरकार गिरने के बाद से जेडीएस भी कांग्रेस से अलग हुई है और असम विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से खुद को अलग किया है। सपा और रालोद 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मिल कर लड़े थे लेकिन 2019 से पहले ही यह गठबंधन टूट गया था।

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