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केंद्रीय मंत्रियों पर ग्रहण!

ऐसा लग रहा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर पहले दिन से कोई ग्रहण लगा हुआ है। पिछले छह साल में कई मंत्रियों का असामयिक निधन हुआ है। 2014 में पहली सरकार बनने के तुरंत बाद भाजपा के दिग्गज नेता गोपीनाथ मुंडे के निधन से इसकी शुरुआत हुई थी, जो रामविलास पासवान के निधन तक जारी है। मुंडे ने 26 मई 2014 को केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में शपथ ली थी और एक हफ्ते के बाद तीन जून को उनका निधन हो गया था। वे दिल्ली में एक एक्सीडेंट में घायल हुए थे और उसके बाद उनकी मौत हो गई थी।

पिछली सरकार के रसायनिक खाद व उर्वरक और संसदीय कार्यमंत्री मंत्री अनंत कुमार का 2019 के लोकसभा चुनाव से छह महीना पहले ही निधन हुआ। वे कुछ समय तक बीमार रहे और इलाज के लिए विदेश भी गए थे। उनसे एक साल पहले केंद्र की मोदी सरकार के वन व पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे का निधन हुआ था। उनका दिल्ली के एम्स में इलाज चल रहा था। दवे 61 साल के थे, अनंत कुमार 59 साल के और मुंडे 65 साल के थे। पिछली सरकार में रक्षा मंत्री रहे मनोहर पर्रिकर का निधन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च 2019 में हुआ। हालांकि उस समय वे केंद्र में मंत्री नहीं थे। निधन के समय वे गोवा के मुख्यमंत्री पद पर थे। उनकी उम्र 63 साल थी।

पिछली सरकार में मंत्री रहे अरुण जेटली और सुषमा स्वराज सेहत के हवाले इस बार सरकार से दूर रहे। मई 2019 में दूसरी बार सरकार बनने के थोड़े दिन के बाद थोड़े-थोड़े अंतराल पर दोनों का निधन हो गया। दोनों का पिछले साल अगस्त में निधन हुआ। मौजूदा सरकार के दो मंत्रियों का निधन भी एक महीने के अंतराल में हो गया है। पहले रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगडी का कोरोना वायरस की वजह से निधन हुआ और अब खाद्य आपूर्ति व उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान का निधन हो गया है। अंगडी 65 साल के और पासवान 74 साल के थे।

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