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सपा का तालमेल छोटी पार्टियों के साथ

उत्तर प्रदेश में सबसे व्यवस्थित तरीके से चुनावी तैयारी समाजवादी पार्टी कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उम्मीदवारों की छंटनी के साथ साथ पार्टियों के साथ तालमेल की तैयारी भी काफी हद तक कर ली है। उन्होंने यह साफ कर दिया है कि पहले जिन दो बड़ी पार्टियों के साथ तालमेल करके वे लड़े थे उनसे कोई समझौता नहीं होगा। इसका मतलब है कि कांग्रेस और बसपा से तालमेल की गुंजाइश खत्म है। इसकी बजाय वे छोटी पार्टियों के साथ तालमेल करेंगे। इससे ज्यादा से ज्यादा जातियों को अपने साथ जोड़ने में सहूलियत होगी। जानकार सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव तीन या चार छोटी पार्टियों से तालमेल करेंगे।

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इसमें एक बहुजन समाज पार्टी से अलग होकर बनने वाली नई पार्टी भी होगी। ध्यान रहे बसपा के 11 विधायकों ने ऐलान किया है कि एक और विधायक का समर्थन लेकर वे बसपा से अलग नई पार्टी बनाएंगे। उनके साथ ही यह भी कह दिया है कि नई पार्टी का तालमेल समाजवादी पार्टी से होगा। बसपा से अलग होने वाली पार्टी गैर जाटव दलित और गैर यादव पिछड़ी जातियों की प्रतिनिधि पार्टी होगी। इसके नेता लालजी वर्मा होंगे, जो कुछ दिन पहले तक विधानसभा में बसपा के नेता थे। हैरानी की बात है कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी समाजवादी पार्टी से तालमेल की संभावना तलाश रही है। पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के जरिए इसकी बात हो रही है।

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इसके अलावा अखिलेश यादव जयंत चौधरी की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय लोकदल से भी तालमेल करेंगे। ध्यान रहे किसान आंदोलन की वजह से जाट मतदाता भाजपा और केंद्र सरकार से खफा हैं। उनकी प्रतिनिधि पार्टी रालोद है। भाजपा की पुरानी सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से भी समाजवादी पार्टी का तालमेल हो सकता है। पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कह दिया है कि भाजपा से तालमेल नहीं होगा। बसपा और कांग्रेस से तालमेल का कोई मतलब नहीं है। इसलिए वे भी सपा के साथ जाएंगे।

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