UP assembly election polarization यूपी में ध्रुवीकरण के जाल में पार्टियां
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यूपी में ध्रुवीकरण के जाल में पार्टियां

Yogi adityanath

उत्तर प्रदेश में श्मशान और कब्रिस्तान या अली और बजरंग बली के बाद अब अब्बाजान का विवाद शुरू हुआ है। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने पहले श्मशान और कब्रिस्तान के नाम पर और अली और बजरंग बली के नाम पर ध्रुवीकरण कराया था। उसी कड़ी में अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब्बाजान को मुद्दा बनाया है। उन्होंने पहले विधानसभा में मुलायम सिंह को अखिलेश का अब्बाजान बता कर संबोधित किया था। अब उन्होंने कहा है कि उनका राज आने से पहले राज्य में किसी को राशन नहीं मिलता था क्योंकि अब्बाजान बोलने वाले सब राशन खा जाते थे। उनके कहने का मतलब था कि मुसलमानों को समूचा राशन मिल जाता था और हिंदू राशन पाने से वंचित रह जाते थे। UP assembly election polarization

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इसके जवाब में विपक्षी पार्टियों के साथ साथ देश भर के भाजपा विरोधी बौद्धिक भी मैदान में उतर गए हैं। सब अपने पिताजी की फोटो डाल कर उनको अब्बाजान लिख रहे हैं। यह भाजपा के जाल में फंसने जैसा है। यहां मसला अब्बाजान का है ही नहीं। यहां मसला हिंदू बनाम मुस्लिम का है और इसका जवाब इस आंकड़े से दिया जाना चाहिए कि अखिलेश यादव या मायावती के राज में कितने लोगों को राशन मिलता था। पांच-पांच साल दोनों ने राज किया था और दोनों आंकड़े देकर बता सकते हैं कि उनके राज में कितने हिंदू परिवारों को राशन मिलता था। यहां अब्बाजान की बहस में फंसने की बजाय पार्टियां अगर मुसलमानों को ही पूरा राशन दिए जाने के आरोप का जवाब देतीं तो बेहतर होता। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी बौद्धिक और सेकुलर जमात के लोग जाल बिछा कर फेंका गया दाना चुग रहे हैं।

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