Uttar Pradesh BJP Politics : यूपी भाजपा में दूसरी बाजी शुरू - Naya India
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Uttar Pradesh BJP Politics : यूपी भाजपा में दूसरी बाजी शुरू

Uttar Pradesh BJP Politics

Uttar Pradesh BJP Politics | उत्तर प्रदेश में चल रहे भाजपा के आंतरिक घमासान में पहली बाजी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीती है। उन्होंने एके शर्मा को अपनी सरकार में मंत्री नहीं बनाया और मंत्रिमंडल का तत्काल विस्तार करने की संभावना भी टाल दी। उन्होंने अपने हिसाब से राज्य का दौरा किया, कोरोना कंट्रोल करने का काम किया और कहा कि अगले महीने किसी समय मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। लेकिन उनके पहली बाजी जीतते ही दूसरी बाजी शुरू हो गई। यह बाजी मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने को लेकर है।

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आमतौर पर यह माना जाता है कि जो मुख्यमंत्री है उसके चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जाएगा और वहीं मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी होगा। भाजपा ने गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में इसी तरह चुनाव लड़ा था। सिर्फ एक असम है, जहां इसका अपवाद देखने को मिला। पार्टी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा और पार्टी के चुनाव जीतने के बाद हिमंता बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बनाया। तभी उत्तर प्रदेश के चुनाव के लिहाज से यह अहम माना जा रहा है कि पार्टी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री का दावेदार बना कर लड़ती है या नहीं।

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Uttar Pradesh BJP Politics : इस मसले पर पार्टी में खूब बयानबाजी हो रही है और कोई किसी को चुप नहीं करा रहा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह कह चुके हैं कि पार्टी योगी के चेहरे पर लड़ेगी। लेकिन उनकी कही बात अंतिम नहीं है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और सरकार के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव के बाद होगा। उन्होंने कहा कि जीते हुए विधायक तय करेंगे कि कौन मुख्यमंत्री होगा। कुछ समय पहले बहुजन समाज पार्टी से भाजपा में शामिल हुए बड़े नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी कहा कि मुख्यमंत्री का फैसला चुने हुए विधायक करेंगे। इन दोनों के कहने का मतलब है कि पार्टी सीएम का चेहरा प्रोजेक्ट करके नहीं लड़ेगी।

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इस बारे में जब पूछा गया तो पार्टी के प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने आधिकारिक बयान में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य दोनों के बयान पर आपत्ति की। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं को यह कहना चाहिए था कि मुख्यमंत्री पद के दावेदार के बारे में पार्टी का संसदीय बोर्ड फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा में इसकी परंपरा रही है कि संसदीय बोर्ड तय करता है कि पार्टी मुख्यमंत्री का दावेदार पेश करके लड़ेगी या नहीं और अगर लड़ेगी तो कौन दावेदार होगा। जाहिर इस मसले पर आगे खींचतान होनी है। योगी चाहेंगे कि पार्टी उनको मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करके लड़े। दूसरी ओर कई कथित सर्वेक्षणों के आधार पर पार्टी का एक खेमा दावा कर रहा है कि अगर उनको उम्मीदवार बनाया तो सामाजिक समीकरण बिगड़ेगा। यह दूसरी बाजी निपटेगी तब टिकट बंटवारे की तीसरी बाजी शुरू होगी।

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