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राजरंग| नया इंडिया| Up assembly amit shah अमित शाह के नए दांव का क्या मतलब?

अमित शाह के नए दांव का क्या मतलब?

Up assembly amit shah

वैसे तो कोई नेता राजनीति में कोई भी काम अनायास नहीं करता है। उसके पीछे कोई न कोई योजना काम कर रही होती। योजना का सफल होना या न होना अलग बात है, लेकिन बिना योजना या किसी मकसद के नेता कोई दांव नहीं चलते हैं। दांव चलने वाले नेता अगर अमित शाह हों तब तो उसका अर्थ और भी गहरा हो जाता है। तभी यह सवाल उठा है कि बहुजन समाज पार्टी के प्रति सद्भाव दिखा कर अमित शाह ने जो दांव चला है, उसका क्या मतलब है? उन्होंने सिर्फ बसपा के प्रति सद्भाव ही नहीं दिखाया है, बल्कि यह भी कहा है कि मुस्लिम भी बसपा को वोट देंगे।  

सोचें, बसपा को कौन वोट देगा और कौन नहीं देगा या बसपा अभी प्रासंगिक है या अप्रासंगिक हो गई है, इसे लेकर प्रचार के दौरान अमित शाह के बयान देने का क्या मतलब है? एक मोटी बात जो समझ में आती है वह ये है कि भाजपा के दूसरे सबसे बड़े नेता ने बसपा और मायावती के प्रति सद्भाव दिखाया और कहा कि उनको अभी अप्रासंगिक नहीं माना जा सकता है तो इससे दलित मतदाताओं में अच्छा मैसेज जाएगा। इससे यह भी मैसेज जाएगा कि भाजपा और बसपा अंदर से मिले हुए हैं। इससे दलित वोटों का रूझान भाजपा की ओर बन सकता है। दलित के साथ साथ बसपा का समर्थक रहीं अति पिछड़ी जातियों में भी उन्होंने एक मैसेज बनवाया।

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दलित और अति पिछड़ा जातियों को लुभाने का यह दांव अच्छा है लेकिन जैसे ही उन्होंने यह कहा कि मुस्लिम भी बसपा को वोट देंगे वैसे ही उन्होंने अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी यानी समाजवादी पार्टी का भला कर दिया। उनके इस बयान से सपा को बड़ा फायदा होगा। जो भी थोड़ा बहुत मुसलमान बसपा को वोट देने वाला होगा वह भी अमित शाह के बयान के बाद उससे दूर भागेगा। बसपा और मायावती के प्रति उनके सद्भाव दिखाने से भी मुस्लिम मतदाताओं मन का रहा सहा संदेह भी दूर हो गया होगा।

ध्यान रहे उत्तर प्रदेश में पहले से यह चर्चा चल रही है कि बसपा और भाजपा अंदर से मिले हुए हैं और भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए मायावती इस बार के चुनाव में चुपचाप बैठी हैं। अमित शाह के बयान से इन चर्चाओं की पुष्टि हो गई है। मुस्लिम मतदाताओं में यह मैसेज पहुंच गया है कि बसपा को वोट देना, परोक्ष रूप से भाजपा को वोट देने जैसा है क्योंकि चुनाव के बाद अगर त्रिशंकु विधानसभा बनती है तो भाजपा की सरकार बनवाने के लिए बसपा समर्थन दे सकती है या दोनों की मिली-जुली सरकार बन सकती है। तभी यह समझना मुश्किल है कि सपा को फायदा पहुंचाने वाला इस किस्म का बयान अमित शाह ने क्यों दिया?

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