यूपी में अभी से बनने लगा गठबंधन

उत्तर प्रदेश में चुनाव अगले साल होने हैं पर उससे एक साल पहले ही राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण शुरू हो गया है। बड़ी पार्टियां हालांकि अभी चुपचाप तमाशा देख रही हैं पर छोटी पार्टियों ने पोजिशनिंग शुरू कर दी है। राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने ऐलान कर दिया है कि वह अकेले लड़ेगी। हालांकि चुनाव के समय उसका कोई तालमेल हो सकता है। अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल या इस जैसी किसी दूसरी छोटी क्षेत्रीय पार्टी के साथ सपा का तालमेल हो सकता है। शिवपाल सिंह यादव की पार्टी का सपा में विलय भी संभव है। बहुजन समाज पार्टी इस बार अकेले लड़ेगी और अभी तक की स्थितियों से लग रहा है कि कांग्रेस भी अकेले ही लड़ेगी।

चुनाव से एक साल पहले सबसे पहला गठबंधन बनाने का ऐलान भाजपा की पुरानी सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने की है। इसके नेता ओमप्रकाश राजभर ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात की। दोनों ने अगला चुनाव मिल कर लड़ने का ऐलान किया है। ध्यान रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाके में भीम आर्मी का अच्छा-खासा असर है और वे मायावती की पार्टी का बड़ा नुकसान कर सकते हैं। इन दोनों के साथ आने के बाद अब सबकी नजर असदुद्दीन ओवैसी के ऊपर है। उन्होंने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ेगी। हालांकि यह तय नहीं है कि उनका इन दोनों के साथ तालमेल होगा। चंद्रशेखर को ओवैसी से कोई दिक्कत नहीं होगी पर राजभर को हो सकती है। बहरहाल, भाजपा की सहयोगी अपना दल के नेता भी परेशान हो रहे हैं। इसलिए संभव है कि चुनाव से पहले अपना दल भी अलग होकर किसी के साथ तालमेल का ऐलान करे।

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