पंचायत चुनावों से तस्वीर साफ हुई - Naya India
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पंचायत चुनावों से तस्वीर साफ हुई

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों से अगले साल के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनावों की तस्वीर साफ हो गई है। यह तय हो गया कि भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच आमने-सामने का मुकाबला होगा। बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस दोनों सपा का खेल बिगाड़ने वाली पार्टी साबित हो सकती हैं। राज्य में हुए पंचायत चुनावों में इन दोनों पार्टियों का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है और राज्य में पैर जमाने का प्रयास कर रही आम आदमी पार्टी के लिए भी नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। हालांकि पार्टी के नेता कई जगह जीत का दावा कर रहे हैं पर असल में आप समर्थित ज्यादातर उम्मीदवार हार गए हैं।

पंचायत चुनाव पार्टियों के चुनाव चिन्ह पर नहीं हुआ था लेकिन पार्टियों ने उम्मीदवारों को समर्थन दिया था। सबसे अहम चुनाव पंचायत सदस्यों का था। तीन हजार से कुछ ज्यादा पंचायत सदस्यों के चुनाव में भाजपा ने तीन हजार उम्मीदवारों को समर्थन दिया था, जिसमें से एक हजार से थोड़े ज्यादा उम्मीदवार जीते हैं। लगभग इतने ही उम्मीदवार सपा समर्थिक भी हैं। यानी दो-तिहाई सीटें भाजपा और सपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीती है। बाकी सीटों में ज्यादातर पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं।

सपा ने भाजपा को सबसे बड़ा झटका प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में दिया है। कुछ समय पहले हुए विधान परिषद के चुनाव में भी यहां की सीट पर सपा ही जीती थी और इस बार पंचायत सदस्य की 40 सीटों में 15 पर सपा समर्थक जीते हैं, जबकि भाजपा समर्थकों को सिर्फ आठ सीटें मिली हैं। अयोध्या, अयोध्या, वाराणसी और  प्रयागराज में भी भाजपा के मुकाबले सपा समर्थक ज्यादा जीते हैं। भाजपा के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने माना कि कई जगह उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं आए हैं। सो, अगली बड़ी लड़ाई भाजपा और सपा के बीच होनी है। कोरोना वायरस के खराब प्रबंधन की वजह से निशाने पर आई भाजपा को अगले चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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