राजनीति

योगी बनाम शर्मा बनाम मौर्य बनाम बंसल!

उत्तर प्रदेश में क्या चल रहा है? जितने मुंह उतनी बातें हैं। अंदर जो कुछ भी हो रहा है पर इतना तय है कि पार्टी आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई मसलों पर स्वतंत्र रूप से पहल की है, जिससे राज्य में एक से ज्यादा मोर्चे खुल गए हैं।बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पिछले 20 साल से काम कर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी अरविंद शर्मा को उत्तर प्रदेश भेजे जाने के बाद से बात ज्यादा बिगड़ी है। खबर है कि पार्टी आलाकमान शर्मा को प्रदेश में उप मुख्यमंत्री बनवाना चाहता है, जिसके लिए योगी तैयार नहीं हैं। सो, पहला मोर्चा योगी बनाम शर्मा का है। जानकार सूत्रों के मुताबिक शर्मा को उप मुख्यमंत्री बना कर गृह और कार्मिक विभाग की जिम्मेदारी देने का दबाव बढ़ने पर योगी ने कहा कि अगर वे इतने ही काबिल हैं तो उनको केंद्र में मंत्री बना दिया जाए।

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दूसरा मोर्चा योगी बनाम सुनील बंसल का है। सुनील बंसल प्रदेश के संगठन महामंत्री हैं और राज्य में सरकार बनने के बाद से ही वे सत्ता का एक केंद्र रहे हैं। उनको लेकर पिछले साढ़े चार साल में कई विवाद भी हुए। पार्टी कार्यकर्ताओं से बदतमीजी से बात करने का ऑडियो जारी होने से लेकर सरकार के काम में दखल देने तक की खबरें आईं। पिछले दिनों यूपी के पंचायत चुनावों के समय बंसल के पश्चिम बंगाल में डेरा डाले रहने का मुद्दा बना है। ध्यान रहे पंचायत चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। योगी का खेमा खराब प्रदर्शन का जिम्मा पार्टी संगठन पर डाल रहा है। तभी बंसल को बदले जाने की चर्चा भी हो रही है।

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तीसरा मोर्चा योगी बनाम केशव प्रसाद मौर्य है और यह भी पुराना मोर्चा है। ध्यान रहे 2017 के विधानसभा चुनाव के समय मौर्य प्रदेश अध्यक्ष थे और उस समय चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ सारे पोस्टर-होर्डिंग्स में मौर्य का ही चेहरा दिखता था। तब पार्टी ने किसी को मुख्यमंत्री का दावेदार नहीं बनाया था। इसके केंद्रीय प्रचार सामग्री में कहीं योगी का चेहरा नहीं था। वे स्टार प्रचारक थे पर उनसे ऐसा नहीं था कि पार्टी उनके सहारे चुनाव लड़ रही थी। तभी मौर्य को उम्मीद थी कि वे मुख्यमंत्री बनेंगे। जब उनको उप मुख्यमंत्री बनाया गया तभी से नाराज चल रहे हैं।

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सो, अब कुल तस्वीर ऐसी है कि योगी की कैबिनेट में फेरबदल होनी है पर अरविंद शर्मा की वजह से मामला अटका है। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की जगह नया अध्यक्ष बनाना है पर केशव प्रसाद मौर्य की वजह से मामला अटका है। वे अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं बताए जा रहे हैं। संगठन महामंत्री बदला जाना है पर चुनाव से पहले कई लोग इसे जोखिम का काम मान रहे हैं। दूसरे संगठन का जिम्मा किसको दिया जाए वह तय नहीं हो रहा है। सो, कुल मिला कर चुनाव से ऐन पहले पार्टी कई किस्म की मुश्किलों में घिर गई है।

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