प्रियंका को मिली पहली जीत

उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी वाड्रा को काम करते एक साल होने जा रहे हैं। पिछले साल अप्रैल-मई के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले प्रियंका को पार्टी का महासचिव बना कर पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तब उनके साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का काम देखने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को नियुक्त किया गया था। पर प्रियंका और सिंधिया की जोड़ी बुरी तरह से फेल रही थी। प्रियंका की कमान के बावजूद राहुल गांधी अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव हार गए। 15 साल पहले सक्रिय राजनीति में उतरे राहुल की यह पहली हार था। इसके बावजूद प्रियंका ने हार नहीं मानी और वे उत्तर प्रदेश में मेहनत करती रहीं।

लोकसभा चुनाव के बाद 11 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भी कांग्रेस कोई सीट नहीं जीत सकी। पर अब प्रियंका गांधी की कमान में कांग्रेस को पहली जीत मिली है। हालांकि यह कोई बड़ी जीत नहीं है पर मौजूदा हालात को देखते हुए इसका बड़ा मतलब निकाला जा रहा है। देश भर के विश्वविद्यालयों में चल रहे आंदोलन और युवाओं-छात्रों की नाराजगी की खबरों के बीच कांग्रेस पार्टी का छात्र संगठन वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का चुनाव जीत गया है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, एबीवीपी को हरा कर कांग्रेस के एनएसयूआई ने सारी सीटों पर जीत दर्ज की है। इस जीत के एक दिन बाद ही प्रियंका वाराणसी के दौरे पर भी गईं। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वाराणसी प्रधानमंत्री का क्षेत्र है और जीत संस्कृत विश्वविद्यालय में मिली है।

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