Uttar Pradesh election minister मंत्री तो ममता के भी छोड़ रहे थे!
राजरंग| नया इंडिया| Uttar Pradesh election minister मंत्री तो ममता के भी छोड़ रहे थे!

मंत्री तो ममता के भी छोड़ रहे थे!

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बड़ा शोर मचा है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार से मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं और विधायक पार्टी छोड़ रहे हैं। दो दिन में दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया और चार विधायकों के भी पार्टी छोड़ देने की खबर है। कहा जा रहा है कि अभी और भी मंत्री या विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा कि भाजपा के 13 विधायक सपा में जाएंगे। सपा के एक नेता ने कहा कि अगर अखिलेश यादव पार्टी का दरवाजा खोल दें तो भाजपा के दो सौ विधायक सपा में शामिल हो जाएंगे। सवाल है कि भाजपा के विधायकों, मंत्रियों के पार्टी छोड़ने का क्या अनिवार्य नतीजा यह निकाला जाना चाहिए कि भाजपा हारेगी और सपा जीतेगी? Uttar Pradesh election minister

पिछले साल मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हुआ। उस चुनाव से पहले जैसी भगदड़ तृणमूल कांग्रेस में मची थी, उसके मुकाबले उत्तर प्रदेश में मची भगदड़ कुछ नहीं है। स्वामी प्रसाद मौर्य बहुत मजबूत नेता हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में वे उस हैसियत के नेता नहीं हैं, जिस हैसियत के नेता पश्चिम बंगाल सुवेंदु अधिकारी हैं। सुवेंदु अधिकारी का जलवा दुनिया ने देखा कि उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हरा दिया। ममता बनर्जी की पार्टी इस चुनाव में पहले से ज्यादा सीट जीती लेकिन वे भी सुवेंदु अधिकारी को नहीं हरा सकीं। दूसरी ओर स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी और बेटे की सीट की चिंता करते दिख रहे हैं।

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सुवेंदु अधिकारी अकेले नेता नहीं थे। तृणमूल कांग्रेस के करीब एक दर्जन विधायकों ने पाला बदला था। सांसदों ने भी खुल कर पार्टी का विरोध किया और भाजपा का साथ दिया। इसके बावजूद नतीजा सबको पता है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि उत्तर प्रदेश में भी पश्चिम बंगाल जैसा नतीजा आएगा। लेकिन इस फैक्टर को ध्यान में रख कर विचार करना होगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने बहुत शानदार प्रदर्शन किया। वह तीन विधायकों की पार्टी थी लेकिन पिछले साल के चुनाव में उसके 77 विधायक जीते और उसको 38 फीसदी वोट मिला। हालांकि ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं हुआ कि तृणमूल के बहुत सारे नेता भाजपा में चले गए थे, बल्कि इसलिए हुआ क्योंकि वहां की जनसंख्या संरचना के कारण ध्रुवीकरण का भाजपा को फायदा हुआ था।

अगर वैसा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण अगर उत्तर प्रदेश में होता है तो निश्चित तौर पर फायदा भाजपा को होगा। लेकिन अगर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं होता है और सोशल इंजीनियरिंग काम करती है, जिसमें अन्य पिछड़ी जातियों की एकजुटता मुस्लिम और यादव समीकरण के साथ बनती है तब फायदा सपा को होगा। इस लिहाज से स्वामी प्रसाद मौर्य या दारा सिंह चौहान और इनके साथ भाजपा छोड़ने वाले नेताओं की सामाजिक और जातीय पृष्ठभूमि अहम है। इन नेताओं की वजह से भाजपा की सोशल इंजीनयरिंग फेल हो सकती है। ध्यान रहे भाजपा अपने सवर्ण वोट बैंक के साथ गैर यादव पिछड़ों और गैर जाटव दलितों को जोड़ कर सफल राजनीति कर रही है। पर इस बार यह समीकरण टूट सकता है।

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