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तीरथ सिंह को उपचुनाव की चिंता

Tirath Singh Rawat

नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने उत्तराखंड में मुख्यमंत्री तो बदल दिया पर अब नए मुख्यमंत्री को उपचुनाव की चिंता सता रही है। नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत लोकसभा के सांसद हैं और उनको छह महीने के अंदर विधायक बनना है, जिसमें से तीन महीने बीत चुके हैं। वे 10 मार्च को मुख्यमंत्री बने थे और 10 सितंबर से पहले उनको विधायक बनना है। अब भाजपा के सामने बड़ा सवाल है कि वे कहां से चुनाव लड़ेंगे। राज्य में विधानसभा की एक सीट पहले से खाली है। भाजपा के विधायक गोपाल रावत के निधन से गंगोत्री सीट खाली हुई थी। उनको वहां से लड़ने को कहा जा रहा है पर वह सीट बहुत आसान नहीं है। ऊपर से अगले साल फरवरी में विधानसभा के चुनाव होने हैं, इस वजह से कांग्रेस भी पूरी ताकत लगाएगी।

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तभी मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत अपनी गढ़वाल लोकसभा सीट के अंदर ही किसी विधानसभा से ल़ड़ना चाहते हैं। उनकी नजर श्रीनगर या गढ़वाल विधानसभा सीट पर है। मुश्किल यह है कि श्रीनगर से धन सिंह रावत और गढ़वाल से सतपाल महाराज विधायक हैं। ये दोनों मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं इसलिए इनकी सीट खाली नहीं होगी। इस बीच नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के निधन से उनकी हल्दवानी सीट खाली हुई है पर वहां से चुनाव लड़ना ज्यादा जोखिम भरा होगा। एक रास्ता यह भी बताया जा रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी डोईवाला सीट खाली कर दें और वे तीरथ सिंह रावत की गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ें। इस तरह तीरथ सिंह डोईवाला से लड़ सकते थे। लेकिन कहा जा रहा है कि भाजपा आलाकमान इस समय लोकसभा सीट पर उपचुनाव कराने के मूड में नहीं है। तभी पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव जीते दो लोकसभा सांसदों से विधानसभा की सीट ही छुड़वाई गई। सो, ले-देकर मुख्यमंत्री रावत के सामने गंगोत्री सीट का ही विकल्प है। उस सीट पर लड़ाई घमासान होगी।

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