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Monday, April 19, 2021
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प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीनेशन पर जोर!

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ऐसा लग रहा है कि कोरोना वायरस के वैक्सीनेशन में सरकारी अस्पतालों से ज्यादा निजी अस्पतालों पर जोर दिया जा रहा है। सरकार भी निजी अस्पतालों में वैक्सीनेशन को ज्यादा प्रमोट करती दिख रही है। दूसरे चरण का वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जरूर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में जाकर वैक्सीन लगवाई पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुग्राम के निजी अस्पताल मेदांता मेडिसिटी में वैक्सीन लगवाई। इतना ही नहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी निजी अस्पताल दिल्ली हर्ट एंड लंग्स अस्पताल में जाकर वैक्सीन लगवाई।

खास बात यह है कि डॉक्टर हर्षवर्धन ने बताया कि उन्होंने ढाई सौ रुपए देकर वैक्सीन लगवाई है। अब सवाल है कि भारत सरकार के मंत्रियों को क्यों निजी अस्पताल में पैसे देकर टीका लगवाना चाहिए? जिस तरह से प्रधानमंत्री ने एम्स जाकर टीका लगवाया क्या उस तरह से बाकी मंत्री सरकारी अस्पतालों में टीका नहीं लगवा सकते हैं? निजी अस्पतालों में टीकाकरण को प्रमोट  करने की क्या जरूरत है? ऐसा तो है नहीं कि निजी अस्पताल वाले अलग टीका लगा रहे हैं और सरकारी अस्पताल में दूसरा टीका लग रहा है? भारत में दो ही टीके- कोवैक्सीन और कोवीशील्ड लगवाए जा रहे हैं।

भारत सरकार कुछ शर्तों के साथ आम लोगों के लिए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू होने के दूसरे ही दिन नियमों में बदलाव किया और यह ऐलान कर दिया कि सारे निजी अस्पताल वैक्सीन लगा सकते हैं। पहले 12 हजार से कुछ ज्यादा अस्पतालों के बारे में खबर आई थी कि उन्हीं में वैक्सीन लगेगी। इतना ही नहीं यह भी बदलाव किया गया है कि निजी अस्पताल 24 घंटे और सातों दिन टीकाकरण कर सकते हैं। पहले सुबह नौ से पांच बजे तक का समय दिया गया था लेकिन अब निजी अस्पतालों में पूरे दिन टीका लगेगा।

इस बात की पूरी संभावना है कि निजी अस्पतालों में जितनी तेजी से टीकाकरण होगा उतनी ही सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण की स्पीड कम होती जाएगी। इसका कारण यह है कि एक तो वैक्सीन की एक डोज का खर्च सिर्फ ढाई सौ रुपए है और ऊपर से प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों आदि के टीका लगवाने से लोगों का इन पर भरोसा भी बना है। तीसरी बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में लोगों के लिए टीका लगवाना बहुत मुश्किल है। अनेक लोगों ने पहले दो दिन के अनुभव सोशल मीडिया में शेयर किए हैं, जिनसे लगता है कि वे उब कर निजी अस्पताल में चले गए। ऐसा लग रहा है कि सरकार ने बहुत सोच विचार कर वैक्सीनेशन का दूसरा चरण शुरू किया है। इससे सरकार अनिवार्य टीकाकरण को भी लागू कर रही है और अपना खर्च भी कम कर रही है। वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को अलग इसका फायदा मिल रहा है। कुछ दिन पहले खबर आई थी कि सीरम इंस्टीच्यूट ने करोड़ों की संख्या में वैक्सीन की डोज बना कर पहले रख ली थी, जो अप्रैल में एक्सपायर होने वाली है। अब निजी अस्पतालों में 24 घंटे वैक्सीनेशन से उनकी खपत हो जाएगी।

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