सबके लिए फ्री नहीं होगी वैक्सीन

अब धीरे धीरे यह स्पष्ट हो रहा है कि कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने वाली वैक्सीन सबके लिए फ्री नहीं होगी। कुछ लोगों को इसके लिए पैसे चुकाने होंगे। ऐसा नहीं है कि सरकार जब निजी अस्पतालों को वैक्सीन लगाने की छूट देगी और जो लोग वहां से वैक्सीनेशन कराएंगे उन्हीं को पैसा चुकाना होगा। यह भी संभव है कि सरकार वैक्सीनेशन को अपने नियंत्रण में रखते हुए भी कुछ लोगों से पैसा वसूल सकती है। जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार दूसरे चरण में जिन लोगों को वैक्सीन लगाई जानी है उनकी दो श्रेणियां बना रही है। एक श्रेणी 50 साल से ऊपर के लोगों की है और दूसरी 60 साल से ऊपर के लोगों। पहले इसमें एक ही श्रेणी रहने वाली थी।

बताया जा रहा है कि सरकार इसमें आर्थिक-सामाजिक आधार पर अंतर कर सकती है। मार्च में शुरू हो रहे दूसरे चरण की वैक्सीनेशन के लिए कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन के बाद सरकार आधार या मतदाता सूची से बाकी जानकारी हासिल करेगी और उस आधार पर वैक्सीन का समय और जगह तय होगी। तभी लोगों को पता चलेगा कि उन्हें पैसा देना है या वैक्सीन फ्री में लगेगी। इसमें मुश्किल यह है कि कई राज्यों ने मुफ्त में वैक्सीन लगाने का ऐलान किया है। इनमें भाजपा शासित राज्य भी हैं। ऐसे राज्यों को कोई उपाय करना होगा, जिससे वे मुफ्त वैक्सीन का वादा पूरा कर सकें।

दूसरा, सवाल यह भी उठ रहा है कि केंद्र सरकार ने बजट में वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है तो वह इस पैसे को पूरे पैसे को वैक्सीन पर खर्च क्यों नहीं कर रही है? कई जानकारों का कहना है कि पहले और दूसरे चरण की वैक्सीनेशन का पूरा खर्च सरकार को उठाना चाहिए। सबको फ्री में वैक्सीन नहीं लगाए जाने की खबरों के बाद अब अनिवार्य वैक्सीनेशन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

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