भाजपा में बाहरी नेताओं की मुश्किल

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की राजनीति में वैसे तो बहुत फर्क है। पर एक फर्क बहुत खास है। वह फर्क ये है कि न तो भाजपा से निकल कर कोई नेता सफल होता है और न बाहर से आकर भाजपा में शामिल होने वाला कोई नेता सफल होता है, जबकि कांग्रेस में इसका उलटा होता है। कांग्रेस में बाहर से आकर भी नेता सफल हो जाते हैं और कांग्रेस से बाहर निकल कर तो नेताओं के सफल होने की अनेक मिसालें हैं। शरद पवार से लेकर ममता बनर्जी और जगन मोहन रेड्डी तक के उदाहरण दिए जा सकते हैं।

चूंकि पिछले कुछ समय से देश की राजनीति में भाजपा का ऐसा विस्तार हुआ है कि हर पार्टी के लोग खुद चल कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। जैसे पहाड़ों से निकल कर सारी नदियां अंततः समुद्र में मिलती हैं वैसे ही कांग्रेस से निकल कर अंततः सारे नेता सीधे या घूम-फिर कर भाजपा में जा रहे हैं। पर भाजपा में उनके लिए बहुत सीमित अवसर होते हैं। चुनाव के समय पाला बदलने वालों को तो विधानसभा या लोकसभा की टिकट मिल जाती है, उनमें से कुछ मंत्री भी बन जाते हैं। पर उसके आगे जाने का स्कोप नहीं होता है। मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष आदि बाहरी नेताओं को नहीं बनाया जाता है। राज्यसभा या विधान परिषद की सीटें भी कम ही लोगों को मिलती हैं।

जैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यसभा की सीट ले ली और हो सकता है कि केंद्र में मंत्री भी बन जाएं। पर कई दूसरे नेता उनकी तरह भाग्यशाली नहीं निकले। ओड़िशा में बैजयंत जय पांडा सत्तारूढ़ बीजू जनता दल को छोड़ कर आए पर अभी तक राज्यसभा मिलने के इंतजार में बैठे हैं। पश्चिम बंगाल में मुकुल राय सरकार चला रही तृणमूल कांग्रेस से निकल कर भाजपा में गए और अभी तक राज्यसभा के लिए हाथ पसारे बैठे हैं। हिमंता बिस्वा सरमा ने भी मान लिया है कि उनको प्रदेश की राजनीति में जितनी जगह मिल गई है उससे ज्यादा नहीं मिलने वाली है। इसलिए वे भी सांसद बन कर केंद्र में मंत्री बनने की जुगाड़ में लगे हैं।

वैसे यह तथ्य है कि नरेंद्र मोदी की सरकार में भाजपा कोटे से एक भी ऐसा मंत्री नहीं है, जो दूसरी पार्टी से आया हो। कांग्रेस छोड़ कर गए जगदंबिका पाल भाजपा की टिकट से जीत रहे हैं पर मंत्री बनने की आस पूरी नहीं हुई है, जबकि कांग्रेस की सरकार में शंकर सिंह वाघेला से लेकर बेनी प्रसाद वर्मा और श्रीकांत जेना तक कई ऐसे नेता मंत्री बने, जो दूसरी पार्टियों से कांग्रेस में गए थे।

दूसरी ओर कांग्रेस में बाहर से आए नेता को कुछ भी बनाया जा सकता है। जैसे शिव सेना से आए संजय निरूपम मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष हो गए थे। जेडीएस से कांग्रेस में गए सिद्धरमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री हो गए थे और अभी नेता विपक्ष हैं। झारखंड विकास मोर्चा छोड़ने के तुरंत बाद अजय कुमार को कांग्रेस ने झारखंड का अध्यक्ष बना दिया था और अब वे फिर पार्टी छोड़ कर भी जा चुके। राजद से कांग्रेस में गए अखिलेश सिंह राज्यसभा सासंद हैं और लोकसभा चुनाव के समय बिहार में चुनाव अभियान समिति के प्रमुख थे।

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