west bengal by polls ममता के लिए उपचुनाव की घोषणा
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ममता के लिए उपचुनाव की घोषणा!

Mamta banerjee

west bengal by polls पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी उपचुनावों को लेकर जरूरत से ज्यादा बेचैन थी। पता नहीं क्यों उनको यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि केंद्र सरकार किसी हाल में उपचुनाव नहीं रूकवाएगी। उपचुनाव रूकवा कर ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद से हटाने का दांव भाजपा पर बहुत भारी पड़ सकता था। उसके बाद ममता अपने को विक्टिम बता कर पूरे देश में राजनीति कर सकती थीं, जिससे पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए बची-खुची संभावना भी खत्म हो जाती। इसी बहाने ममता अगर अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को मुख्यमंत्री बना देतीं तो पार्टी में नेतृत्व का सवाल भी हमेशा के लिए सुलझ जाता।

तभी ममता की बेचैनी समझ से परे थी। यह लगभग तय था कि केंद्र सरकार चुनाव नहीं रोकेगी और ममता के विधायक बनने की संवैधानिक बाध्यता का छह महीने का समय पूरा होने से पहले चुनाव करा लिए जाएंगे। यह अनुमान सही साबित हुआ। केंद्रीय चुनाव आयोग ने देश के अलग अलग राज्यों में 31 विधानसभा सीटों के लिए होने वाला उपचुनाव टाल दिया है लेकिन पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट सहित कुछ अन्य सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। ध्यान रहे ममता बनर्जी को अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट से ही चुनाव लड़ना है, जो उनके लिए उनकी पार्टी के शोभनदेव चटर्जी ने खाली की है।

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बहरहाल, चुनाव की घोषणा से एक दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई, जिसमें अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह जल्दी से जल्दी उपचुनाव कराने का आदेश चुनाव आयोग को दे। राम प्रसाद सरकार ने अपनी याचिका में जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 150 और 151 का हवाला देते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पांच मई को शपथ ली थी। उन्होंने आगे कहा है कि अदालत केंद्रीय चुनाव आयोग, केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दे कि वे जल्दी से जल्दी उपचुनाव की तारीखें बताएं। इस जनहित याचिका पर आठ सितंबर को सुनवाई होनी है लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं होगी।

जो हो ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को इतनी बेचैनी नहीं दिखानी चाहिए थी। इससे सत्ता के प्रति मोह का भी पता चलता है और यह भी मैसेज जाता है कि वे हर हाल में पद पर बने रहना चाहती हैं। कुछ दिन पहले ही केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव से बात की थी और उनसे कोरोना से लेकर बाढ़ और दशहरा के त्योहार सहित कई मामलों की जानकारी मांगी थी। इससे अंदाजा हो गया था कि आयोग जल्दी ही चुनावों की घोषणा करेगा।

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