ममता के खिलाफ मजबूरी में प्रियंका
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ममता के खिलाफ मजबूरी में प्रियंका

priyanka tibrewal

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्रियंका टिबरीवाल को उम्मीदवार बनाया है। जानकार सूत्रों के मुताबिक प्रियंका मजबूरी की उम्मीदवार है क्योंकि अलग अलग कारणों से पार्टी के दिग्गज नेता भवानीपुर सीट से उपचुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुए है। बताया जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी को फिर से कहा गया था कि वे चुनाव लड़ें। आखिर उन्होंने ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर हराया था। वे विपक्ष के नेता हैं और अगर इस सीट से नहीं जीत पाते तो नंदीग्राम जीतने की वजह से जो मनोवैज्ञानिक बढ़त उनको और पार्टी को हासिल है वह खत्म हो जाती। तभी कहा जा रहा है कि बाद में खुद पार्टी ने ही उनको लड़ने से रोक दिया।

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इसके बाद खबर आई थी कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा सांसद दिलीप घोष के लड़ने पर चर्चा हुई थी। दिलीप घोष ने कहा भी था कि वे लड़ने को तैयार हैं। लेकिन पार्टी के लिए संभावना कम देख कर उनको भी रोक दिया गया। यह भी खबर है कि फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से भाजपा नेताओं ने बात की थी और उनको भवानीपुर सीट लड़ने को कहा था। पर उन्होंने मना कर दिया। उसके बाद प्रियंका टिबरीवाल के नाम पर विचार किया। वे वकील हैं और बंगाल में चुनाव बाद की हिंसा को लेकर उन्होंने अदालत में याचिका दी थी। इसके अलावा उनके पक्ष में एक बात यह भी है कि भवानीपुर सीट पर गुजराती और मारवाड़ी समुदाय के लोगों की अच्छी खासी संख्या है। प्रियंका वैश्य समाज से आती हैं इसलिए भाजपा इस वोट के ध्रुवीकरण की संभावना देख रही है। उन्होंने भी अपना चुनाव अभियान शुरू करते हुए कहा है कि  वे भवानीपुर में जन्मी हैं, जबकि ममता बाहरी हैं। गौरतलब है कि भवानीपुर ममता बनर्जी की पारंपरिक सीट है वे 2011 और 2016 में इसी सीट से जीती थीं।

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