क्या बंगाल की हिंसा प्रायोजित थी? - Naya India
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क्या बंगाल की हिंसा प्रायोजित थी?

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में 10 अप्रैल को चौथे चरण के मतदान के दिन जो हिंसा हुई उसकी दो जांच हो रही है। पश्चिम बंगाल सरकार ने सीआईडी से इसकी जांच के आदेश दिए हैं तो केंद्रीय चुनाव आयोग ने भी एक जांच शुरू कराई है। दोनों जांचों का क्या नतीजा होगा, यह पहले से पता है। चुनाव आयोग की शुरुआती जांच रिपोर्ट में जो कहा गया है वहीं अंतिम नतीजा होगा कि भीड़ ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर हमला किया और केंद्रीय बलों ने आत्म रक्षा में गोली चलाई, जिसमें चार लोग मारे गए। दूसरी ओर राज्य सरकार की रिपोर्ट में कहा जाएगा कि सुरक्षा बलों ने मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया और विरोध करने पर गोली चला कर मार दिया। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि कौन सी जांच रिपोर्ट सही है और कौन  सी पूर्वाग्रह से ग्रसित है।

लेकिन यह सवाल तो उठता है कि क्या कूचबिहार में 10 अप्रैल को हुई हिंसा प्रायोजित थी? चूंकि बंगाल में चल रहे चुनाव के हर चरण में कुछ न कुछ ऐसा हो रहा है। इससे पहले छह अप्रैल को चुनाव हुआ उससे ठीक पहले छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 23 जवान शहीद हुए थे। उससे भी पहले एक अप्रैल वाले मतदान के दिन केंद्र सरकार ने लघु बचत योजनाओं पर ब्याज घटाने का फैसला वापस लिया था। इसलिए यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि 10 अप्रैल को भी कुछ होगा।

दूसरे, ममता बनर्जी बार बार आरोप लगा रही थीं कि केंद्रीय बल मतदाताओं को डरा-धमका रहे हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आदेश ले रहे हैं। तभी घटना के तुरंत बाद उन्होंने कहा कि उनको जो आशंका थी वह सही साबित हो गई।  अब सवाल है कि अपनी आशंका को सही साबित करने के लिए उन्होंने कुछ किया या चुनाव को प्रभावित करने के लिए भाजपा ने कुछ कराया? ध्यान रहे पहले तीन चरण के बाद मतदान ममता बनर्जी के असर वाले इलाकों में है। इसलिए चुनाव प्रभावित होने का असर ममता के वोट  पर पड़ेगा। ध्यान रहे अब तक हुए चार चरण के मतदान में सबसे कम मतदान चौथे चरण में ही हुआ, जो ममता के असर का इलाका था और जहां हिंसा हुई। इसी हिंसा के बहाने चुनाव आयोग ने अर्धसैनिक बलों की 71 और टुकड़ियां बंगाल भेजने को कहा है।

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