कांग्रेस और सहयोगियों की आपसी लड़ाई - Naya India
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कांग्रेस और सहयोगियों की आपसी लड़ाई

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियां आपस में भी जोर-आजमाइश कर रही हैं। पांचवें चरण में कई सीटों पर कांग्रेस, सीपीएम और इन दोनों की नई सहयोगी इंडियन सेकुलर फ्रंट के उम्मीदवार आमने-सामने लड़ रहे हैं। इस लड़ाई ने कांग्रेस की चिंता बढ़ाई है क्योंकि यह मुकाबला कांग्रेस के पारंपरिक और उसके प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के मजबूत असर वाले इलाके में है। माल्दा और मुर्शिदाबाद के इलाक में कांग्रेस बहुत अच्छे नतीजे की उम्मीद कर रही है पर इन इलाकों में इंडियन सेकुलर फ्रंट और सीपीएम दोनों ने कई सीटों पर कांग्रेस का खेल बिगाड़ा हुआ है।

फरक्का, रानीनगर और मुर्शिदाबाद, इन तीन सीटों पर कांग्रेस के मुकाबले इंडियन सेकुलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने अपना उम्मीदवार उतार दिया है। मुस्लिम बहुल इन सीटों पर अब्बास सिद्दीकी अपनी नई पार्टी के लिए अच्छी संभावना देख रहे हैं। इसी तरह नोवडा सीट पर कांग्रेस के मुकाबले सीपीएम ने एक निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दिया है। इससे नाराज होकर कांग्रेस ने शमशेरगंज सीट पर सीपीएम के मुकाबले अपना उम्मीदवार उतारा है। इन पांच सीटों पर कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों की आपसी जोर-आजमाइश का असर आसपास की कई सीटों पर पड़ रहा है। हालांकि कोई पक्के तौर पर यह नहीं कह सकता है कि कांग्रेस और सहयोगियों की आपसी लड़ाई का फायदा ममता बनर्जी को मिलेगा या भाजपा को! कहा जा रहा है कि अगर अल्पसंख्यक वोटों का कुछ हिस्सा भी तृणमूल कांग्रेस के साथ गया तो यह वोट तीन हिस्सों में बंटेगा, जिसका फायदा भाजपा को हो सकता है।

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