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Monday, April 19, 2021
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ममता के खिलाफ मोदी का माइंड गेम

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क्रिकेट के बारे में दशकों पहले सुनील गावसकर ने कहा था कि यह माइंड गेम है। सब मानते हैं कि क्रिकेट स्किल का गेम है लेकिन जो कप्तान विरोधी टीम के दिमाग के खेलना जान गया वह सबसे सफल होता है। वहीं राजनीति और खास कर चुनाव के खेल में भी हो रहा है। बुनियादी रूप से चुनाव लोकप्रिय समर्थन के आधार पर जीता या हारा जाता है। लेकिन जो नेता विरोधियों के दिमाग से खेलना जान जाता है वह सफल होता है। हालांकि यह सफलता का अंतिम सूत्र नहीं है फिर भी बेहद कारगर है, खास कर वहां जहां किसी पार्टी के पास जन समर्थन कम है। जन समर्थन की कमी की भरपाई माइंड गेम से की जाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके गृह मंत्री अमित शाह यही खेल पश्चिम बंगाल में खेल रहे हैं। भाजपा के पास बंगाल में जन समर्थन कम है, संगठन बिल्कुल नहीं है और जमीनी स्तर पर मजबूत नेताओं की भारी कमी है। मोदी और शाह इसकी भरपाई बयानों से कर रहे हैं। बार बार तृणमूल कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि मोदी और शाह का माइंड गेम बंगाल में नहीं चलेगा, लेकिन इसका पता चुनाव नतीजों से ही चल पाएगा। फिलहाल तो अपनी जीत के बड़े बड़े दावे करके मोदी और शाह ने माहौल तो बनाया हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव को प्रभावित करने के नए तरीके की ईजाद कुछ साल पहले की थी। चुनाव आयोग कई चरणों में मतदान कराता है और वे हर चरण के मतदान के दिन उस राज्य के किसी दूसरे इलाके में रैली करते हैं। सो, बुधवार को जब बंगाल में तीसरे चरण का मतदान चल रहा था तो प्रधानमंत्री मोदी की रैली भी चल रही थी, जिसे देश का प्रतिबद्ध मीडिया लाइव दिखाता है। इस रैली में मोदी ने कहा कि चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस टूट जाएगी और उसका अस्तित्व खत्म हो जाएगा। यह ताजा माइंड गेम है। इससे पहले वे तृणमूल कांग्रेस के सिर्फ हारने की बात करते थे, अब उन्होंने अस्तित्व मिट जाने की बात कही है। हालांकि उनको भी पता है कि एक-दो चुनाव हारने से पार्टियों का अस्तित्व नहीं मिटा करता है। ऐसा होता तो भारतीय जनसंघ और भाजपा का अस्तित्व भी काफी पहले मिट चुका होता।

बहरहाल, इससे पहले उन्होंने माइंड गेम के अल्टीमेट हथियार के तौर पर अपनी प्रधानमंत्री पद की पोजिशन का इस्तेमाल करते हुए राज्य के अधिकारियों चुनावी रैली में निर्देश दिया कि उन्हें क्या क्या तैयारी करनी है और वे जब शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने कोलकाता आएंगे तब तक क्या क्या हो गया होना चाहिए। इससे उन्होंने तृणमूल काडर का हौसला पस्त किया और राज्य के ऐसे मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया, जिन्होंने अभी तक फैसला नहीं किया है। मतदान के हर चरण के बाद भाजपा के नेता बिल्कुल एक्जिट पोल के अंदाज में भविष्यवाणी कर ही रहे हैं कि भाजपा जीत चुकी है। इससे भी विरोधियों का हौसला पस्त किया जा रहा है।

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