बंगाल में बिहार को दोहरा पाएंगे पीके? - Naya India
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बंगाल में बिहार को दोहरा पाएंगे पीके?

प्रशांत किशोर के लिए जिस तरह पांच साल पहले बिहार का चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल था वैसा ही इस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव है। बिहार में उन्होंने भाजपा से अपना बदला ले लिया था। राजद, जदयू और कांग्रेस के तालमेल से लेकर सीटों के बंटवारे, उम्मीदवार का चयन, चुनाव की रणनीति, प्रचार आदि सब कुछ प्रशांत किशोर की आईपैक की टीम ने संभाला था। तब भाजपा ने महागठबंधन से ज्यादा बडा गठबंधन बना कर चुनाव लड़ा था और बुरी तरह से हारी थी। भाजपा की उस शर्मनाक हार और महागठबंधन की जीत का श्रेय प्रशांत किशोर को मिला था। हालांकि बाद में भाजपा और जदयू फिर मिल गए।

अब प्रशांत किशोर पर पश्चिम बंगाल में बिहार को दोहराने की जिम्मेदारी है। क्या वे ऐसा कर पाएंगे? प्रशांत किशोर को हैट से खरगोश निकालने वाला जादूगर चुनाव प्रबंधक माना जाता है। वे जिस पार्टी के साथ जुड़े हैं उसने ऐसे ऐसे चमत्कार किए हैं, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। अब उसमें उनकी कितनी भूमिका रही, यह सबको पता नहीं है पर श्रेय उनको ही मिलता है। उन्होंने पहला चमत्कार बिहार में किया था, जब लालू और नीतीश को मिलाया और दूसरा चमत्कार महाराष्ट्र में किया, जहां शिव सेना को कांग्रेस और एनसीपी के साथ जाने के लिए तैयार किया।

इसी तरह के किसी चमत्कार की उम्मीद बंगाल में की जा रही है। क्या प्रशांत किशोर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ लेफ्ट और कांग्रेस के तालमेल का चमत्कार करेंगे? ऐसा लग रहा कि वे वहां बिहार और महाराष्ट्र से अलग दांव चलने वाले हैं। उन्होंने ममता से बात करके लेफ्ट और कांग्रेस को राजनीति करने का स्पेस दिलवाया है। उनकी टीम का मानना है कि इन दोनों का अलग लड़ना तृणमूल के लिए ठीक होगा। बहरहाल, कहा जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के संगठन में हाल में हुई फेरबदल में उनका बड़ा रोल था और पार्टी की टिकट भी उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही मिलेगी। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने हाल ही में माओवादी नेता रहे छत्रधर महतो को पार्टी में शामिल कराया है।

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