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Wednesday, May 12, 2021
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कोरोना बाद के चुनाव में ममता की जीत

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पश्चिम बंगाल में ज्यादा चरण में चुनाव कराने से भाजपा को फायदा होता दिख रहा था। लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण ने समूचा खेल बिगाड़ दिया। पश्चिम बंगाल में आखिरी चार चरण में 158 सीटों पर चुनाव हुआ था। इन चारों चरण के चुनाव कोरोना वायरस की जबरदस्त महामारी के बीच हुए। चौथे चरण में कूचबिहार के इलाके में हिंसा हुई थी और उसके बाद के तीन चरण में 112 सीटों पर मतदान हुआ था। इन तीन चरणों के मतदान ने चुनावी समीकरण को पूरी तरह से बदल दिया। वैसे उससे पहले के चरणों में भी ममता बनर्जी को बढ़त थी, लेकिन आखिरी तीन चरण के मतदान ने उनकी बढ़त को दो सौ के पार पहुंचा दिया। कोरोना वायरस फैलाने का जैसा आरोप भाजपा के बड़े नेताओं और उनकी रैलियों को लेकर लगा उससे ममता बनर्जी को बहुत फायदा हुआ।

आखिरी तीन चरण में 112 सीटों पर हुए मतदान में ममता बनर्जी को 90 के करीब सीटें मिली हैं। इस चरण में आते आते इतना तगड़ा ध्रुवीकरण हो चुका था कि कांग्रेस के अपने असर वाले इलाकों में भी कांग्रेस का सफाया हो गया। पांचवें, छठे और सातवें चरण में माल्दा, मुर्शिदाबाद, दिनाजपुर, कोलकाता, हुगली, हावड़ा आदि जिलों में मतदान हुआ था। कोलकाता जिले जैसे महानगर के इलाके में 11 में से 11 सीटें तृणमूल कांग्रेस ने जीतीं। उससे सटे हावड़ा 16 में से सभी 16 सीटें तृणमूल कांग्रेस को मिलीं। हुगली में 18 में से 14 सीटें ममता की पार्टी ने जीतीं। मुर्शिदाबाद, जो हमेशा कांग्रेस का गढ़ रहा है वहां 22 में से 18 सीटें तृणमूल ने जीतीं और दो सीटों पर उम्मीदवारों की मौत की वजह से चुनाव नहीं हुआ। ऐसे ही बगल के जिले माल्दा की 12 में से आठ सीटें ममता की पार्टी ने जीतीं। इससे जाहिर है कि कोरोना वायरस की महामारी में रैलियां करना और पूरे देश में वायरस को रोकने में विफल रहने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा।

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